ये खुले नाले भी दे रहे मौत को दावत
रावतपुर: वार्ड-54 में शन्नेश्वर मंदिर विनायकपुर के पास छोटा नाला खुला हुआ है। पिछले एक साल में यहां दो हादसे हो चुके हैं। एक युवक की जान भी जा चुकी है।
पनकी: वार्ड-57 स्वराजनगर पनकी में बी ब्लॉक का छोटा नाला भी खुला पड़ा है। इसके अलावा भी पनकी के कई छोटे नाले ऐसे हैं जिनसे कई बार हादसे हो चुके हैं। पार्षद आरती त्रिपाठी ने बताया कि डेढ़ माह पहले ही 30 लाख रुपये से एसबीआई चौराहे के सामने लगे ट्रांसफार्मर से नहर वाली रोड तक पूरे नाले पर पटिया लगवाई है।
जाजमऊ: वार्ड- 96 से गुजरने वाला शीतला बाजार नाला काफी बड़ा है जो जगह-जगह खुला है। पूर्व में इसमें गिरकर कई लोग जख्मी हो चुके हैं। पाषर्द फकर इकबाल ने बताया कि कुछ जगह पटिया लगी हैं, जबकि कहीं-कहीं बड़े वाहन निकलने से टूट गई हैं।
नगर निगम के मुख्य अभियंता मनीष अवस्थी से दो टूक
सवाल: नाले ढंके क्यों नहीं जाते, इससे हादसे होते हैं।
जवाब: सभी नालों को ढंका नहीं जा सकता। नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) के साफ निर्देश हैं कि बड़े नालों (सीओडी, सीसामऊ, रफाका आदि) को ढंक नहीं सकते, क्योंकि इनकी सफाई नहीं हो पाएगी। हां, छोटे नालों को जरूर ढंका जा सकता है, जिससे हादसे न हो।
सवाल: नालों को ढंकने के लिए आने वाले बजट का क्या हुआ?
जवाब: हमने शहरभर के नालों का सर्वे करा रखा है। इनकी लंबाई, गहराई देखी गई है। ये भी देखा गया है कि कितने नाले खुले हैं और कितनों को ढंका गया है। पूरी रिपोर्ट तैयार है। आगे बजट आने पर काम होगा। समय-समय पर बजट आने पर नाले ढंकने का कार्य कराया भी जाता है।