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किस्मत को कोस रहे किसान

Wed, 15 Apr 2015 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर देहात
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जिले में रविवार से रुक रुककर हो रही बारिश की मार ने एक बार फिर किसानों को रुला दिया है। मंगलवार को देहात के अधिकांश हिस्सों में जमकर बारिश हुई।
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खेतों में गेहूं फसल कटाई व मड़ाई का कार्य ठप हो गया है। किसानों पर कुदरत का सितम कम होता नजर नहीं आ रहा है। तीन दिन से मंडरा रहे बादल मंगलवार की दोपहर बाद एक बार फिर मुसीबत बनकर बरसे। दोपहर बाद हुई बारिश के बीच किसान खेतोें में पानी से गेहूं के गट्ठरों को बचाते दिखे। पानी से लबालब खेतों में किसान हाथों से पानी निकालते रहे, जिससे फसल सड़ न जाए।

 बारिश के चलते पहले से ही बर्बाद किसान दिन-प्रतिदिन हो रही बारिश से बुरी तरह परेशान है। बेबस किसान कभी किस्मत तो कभी भगवान को कोस रहे हैं। पहले खरीफ की फसल में सूखा और फिर रबी की फसल में बारिश की मार से किसान बिल्कुल बर्बादी की कगार पर आकर खड़े हो गए हैं। दोनों फसलों पर कुदरत ने इस साल कहर बरपाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जगजीवनपुर के किसान रामबाबू ने बताया कि उसने दो बीघे मेें गेहूं व 10 बिस्वा में चने की फसल बोई थी। जिसके लिए उसने पंजाब नेशनल बैंक अकबरपुर शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 30 हजार रुपए का ऋण लिया था। कड़ी मशक्कत के बाद मुंह मांगी मजदूरी देकर गेहूं की कटाई करा रहा था। एक-दो दिनों में थ्रेसिंग होनी थी। लेकिन बारिश से फसल गीली होने से अब मड़ाई कराना संभव नहीं है।
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वहीं मोहम्मदपुर के किसान जुगुलकिशोर का कहना है कि उन्होंने रबी फसल में 5 बीघे में गेहूं, 4 बीघे में लाही व एक बीघे में चने की फसल बोई है। जिसके लिए बैंक आफ इंडिया शाखा से केसीसी के जरिए 5 लाख रुपए का ऋण लिया था। पता नहीं उनका नसीब खराब है या भवगान उनके पीछे पड़ा है। शनिवार से हो रही बारिश के चलते बची खुची फसलें भी बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं।

मिल्किया के किसान मोहनलाल का कहना है कि उन्होंने 6 बीघे में गेहूं बोया था। बैंक आफ इंडिया से केसीसी से 2 लाख का ऋण लिया है। किसान पहले की बारिश से बर्बाद हो चुका है। किसान पूरी तरह टूट गया है। रहिनियापुर गांव के किसान शिवकुमार ने बताया कि उसके 15 सदस्यीय परिवार का एकमात्र सहारा 3 बीघे की फसल थी। उसमें गेहूं की बुवाई की है। जिसके लिए उसने बड़ौदा ग्रामीण बैंक अकबरपुर शाखा से केसीसी से 30 हजार रुपए का ऋण लिया था। मौसम के तेवर ने किसानों के लिए फिर नई मुसीबत खड़ी कर दी है। फसलों की मड़ाई का कार्य भी ठप हो गया। कल तक मौसम का तेवर यही रहा तो बची-खुची फसलें बिल्कुल बर्बाद हो जाएंगी।
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 मिल्किया के किसान हुब्बलाल ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ गेहूं की कटाई कर रहा था। तभी बारिश शुरू हो गई। उन्होंने खेतों में पड़ी गेहूं की फसल समेटकर एकत्र की है लेकिन मड़ाई का कार्य होना था। बारिश होने से गेहूं के गट्ठे भीग चुके हैं।
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