शहर काजी मिस्बाही ने ये बातें बासमंडी स्थित दारुल कजा में उलमा की बैठक में कहीं। उन्होंने कहा कि वह फसाद और हिंसा के खिलाफ हैं। इस्लाम में हिंसा की कतई गुंजाइश नहीं है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने को भी हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा है। यह गलत है। उलमा की बैठक में शहर काजी साकिब अदीब मिस्बाही ने कहा कि किसी गलत बात के खिलाफ विरोध दर्ज कराना हमारा संवैधानिक हक है।
आगे उन्होंने कहा कि कोई हमारे मजहब और पैगंबर के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी करेगा तो उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संविधान ने हमें इसकी आजादी दी है। इसी से मुल्क के कानून के तहत अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। कोई हमें रोक नहीं सकता। जहां तक फसाद, हिंसा की बात है तो हम कल भी इसके खिलाफ थे और आज भी इसके खिलाफ हैं। इस्लाम में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। हिंसा और विरोध दर्ज कराना दो अलग-अलग मामले हैं। इन्हें एक करके देखा जा रहा है।
बैठक में कहा गया कि भाजपा प्रवक्ता के बयान के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया, बैठक की और ज्ञापन देकर विरोध दर्ज कराया गया। इसे हिंसा की घटना से जोड़ दिया गया और बेकसूर लोगों को फंसाया जा रहा है। शहर काजी ने कहा कि वह आवाम के साथ हैं और उस पर ज्यादती के खिलाफ जो कुछ बन पड़ेगा करते रहेंगे। इस मौके पर नायब शहर काजी कारी सगीर आलम हबीबी, मौलाना अब्दुल मुत्तलिब कादरी, मौलाना असगर अली यार अल्वी, मौलाना हमीयतुल्लाह तिरमिजी, हाफिज सुभानल्लाह, मौलाना अकील अहमद, हाफिज अब्दुर्रहीम बहराइची, मुफ्ती रफी अहमद निजामी आदि मौजूद रहे।