कन्नौज के सबसे बड़े इत्र कारोबारी मलिक ग्रुप पर तलाशी कार्रवाई के दौरान लगभग 10 करोड़ रुपये के कैश लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। जांच में यह भी मिला है कि समूह कोई स्टॉक रजिस्टर नहीं रखता है। 9.40 करोड़ रुपये से अधिक का कैश और दो करोड़ से ज्यादा की ज्वैलरी मिली है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी और एमएलसी पम्पी जैन के इत्र का कारोबार 40 फीसदी कच्चे पर्चे पर चल रहा है। बड़े पैमाने पर अघोषित कमाई मुंबई और दुबई के रियल इस्टेट में भी खपाई गई है। संयुक्त अरब अमीरात यूएई में फर्में बनाई गई हैं।
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इनके जरिये करोड़ों की कैपिटल लाई गई। इसकी आय को बाद में ऊंचे मूल्य शेयर में दिखाया गया। इसी तरह इनके कई पार्टनर जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी 45 करोड़ की आय को रिटर्नों में ही नहीं दिखाया गया। सीबीडीटी ने बताया कि आयकर विभाग ने परफ्यूम निर्माण और रियल इस्टेट के कारोबार में लगे दो समूहों पर 31 दिसंबर को छापा मारा था।
तलाशी और जब्ती अभियान चलाया था। अभियान के दौरान उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु और गुजरात के 40 से अधिक परिसरों को कवर किया गया था। पम्पी जैन के कन्नौज, कानपुर, मुंबई स्थित परिसरों में तलाशी के दौरान पता चला कि समूह इत्र की बिक्री, स्टॉक हेरफेर में लिप्त है।
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अपने मुनाफे को टैक्स के दायरे में आने वाली इकाई से टैक्स छूट वाली इकाई में ट्रांसफर किया जा रहा था। इसके अलावा खर्चों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा था। जांच में इस बात के सुबूत मिले हैं कि रिटेल सेल कच्चे पर्चे पर हो रही थी। जो खरीद हो रही थी वो फर्जी बिलिंग के जरिये हो रही थी।
समूह अपनी फुटकर बिक्री का 35 से 40 फीसदी कारोबार कच्चे में कर रहा है। कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कच्चे बिलों पर चलता पाया गया। यहां से मिले कैश को बहीखाते में कहीं पर भी दर्ज नहीं किया जाता था। करोड़ों रुपये के खातों का पता ही नहीं चला। बोगस कंपनियों के जरिये लगभग 5 करोड़ रुपये लेने का भी पता चला है।
विदेशों में बनाई फर्मे-रिटर्नों में नहीं दिखाई
बताया गया कि समूह ने विदेशों में फर्में बनाई लेकिन रिटर्नों में नहीं दिखाया जा रहा था। संयुक्त अरब अमीरात के ऑफशोर संस्थानों में से एक ने अवैध रूप से शेयर होल्डिंग ली है। समूह की एक भारतीय इकाई में 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन कई गुना ज्यादा प्रीमियम पर किया गया।
यूएई की इकाई से 16 करोड़ लेने के बाद पम्पी जैन की कंपनी ने कोलकाता स्थित बोगस कंपनियों के जरिये अवैध शेयर पूंजी के रूप में 19 करोड़ प्राप्त किए। इन बोगस कंपनियों के निदेशकों में से एक ने शपथपत्र पर स्वीकार किया कि वह एक डमी निदेशक था और उसने समूह के प्रमोटरों के कहने पर समूह की कंपनी की शेयर पूंजी में निवेश किया था।
प्रमोटर देसी और इसका दुबई में विला
बताया गया कि विदेशी फर्मों को देसी प्रमोटर संचालित कर रहे थे। इनकी दो फर्मों का प्रमोटर देसी है। और इसके नाम दुबई में विला मिला है। विला कब खरीदा गया और इसकी खरीद में आय का क्या श्रोत था। इसकी जांच की जा रही है।
मलिक ग्रुप के यहां 10 करोड़ के कैश लेन-देन के प्रमाण मिले
कन्नौज के सबसे बड़े इत्र कारोबारी मलिक ग्रुप पर तलाशी कार्रवाई के दौरान लगभग 10 करोड़ रुपये के कैश लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। जांच में यह भी मिला है कि समूह कोई स्टॉक रजिस्टर नहीं रखता है। 9.40 करोड़ रुपये से अधिक का कैश और दो करोड़ से ज्यादा की ज्वैलरी मिली है। जो जब्त की गई है। कई बैंक लॉकरों को बंद कर दिया गया है और उनको खोलना अभी बाकी है।