सरवनखेड़ा। लाखों खर्च कर बनाया गया सैथा गांव का जनसुविधा केंद्र (सामुदायिक शौचालय) बदहाल है। करीब सात माह से यहां कोई साफ सफाई तक करने नहीं आया है। फर्श धंस चुकी है। महिला व पुरुष शौचालय में गंदगी का अंबार है।
शासन की ओर से खुले में शौच मुक्त ग्राम पंचायत बनाने के लिए वर्ष 2020-21 में सामुदायिक शौचालय बनाने की पहल हुई। इसी के तहत लाखों खर्च कर सैथा में सामुदायिक शौचालय बनवाया गया। यह सामुदायिक शौचालय प्राइमरी स्कूल के पास बना है। तीन साल पहले ग्राम पंचायत द्वारा शौचालय के फर्श पर इंटरलॉकिंग कराई गई। पानी आदि की व्यवस्थाएं दुरुस्त की गईं। इसके बाद इसे आमजन के लिए खोल दिया गया। देखरेख के लिए केयरटेकर चंदा की नियुक्ति भी की गई। केयर टेकर का मानदेय जागृति महिला सहायता समूह के माध्यम से किया गया। परंतु मानदेय का नियमित भुगतान नहीं किया गया।
हालात ये बने की सात माह का मानदेय नहीं मिलने पर केयरटेकर ने काम बंद कर दिया। देखरेख के अभाव में परिसर में गंदगी हो गई। फर्श धंस गई। वहीं महिला व पुरुष शौचालय की शीट आदि क्षतिग्रस्त हो गई। धंसे फर्श की मरम्मत का काम भी ग्राम पंचायत द्वारा नहीं कराया गया। ग्रामीण कैलाश तिवारी ने बताया की करीब आठ माह से शौचालय बदहाल है। कोई इसकी सुध नहीं ले रहा है इससे ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्राम प्रधान कासिम ने बताया कि समूह द्वारा मानदेय न दिए जाने पर केयरटेकर ने काम छोड़ दिया। मानदेय दिलाने के लिए समूह को नोटिस भेजा गया है। प्रभारी खंड विकास अधिकारी विमल सचान ने बताया कि जानकारी नहीं है। जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।