मार्कशीट पर हस्ताक्षर का मेहनताना न मिलने से नाराज कानपुर यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों ने सोमवार को हड़ताल कर दी। इससे कामकाज ठप हो गया। हजारों स्टूडेंटों को बैरंग लौटना पड़ा। कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन के साथ हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। अब कर्मचारियों ने अनिश्चित कालीन आंदोलन छेड़ने या फिर हड़ताल पर जाने का एलान किया है।
इसी सिलसिले में कानपुर यूनिवर्सिटी कर्मचारी एसोसिएशन और परिषद के पदाधिकारियों की मंगलवार को मीटिंग बुलाई गई है। कानपुर यूनिवर्सिटी कर्मचारी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश सिंह और कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष गुरजेश, महामंत्री सियाराम ने हड़ताल का एलान कर प्रशासनिक भवन के सामने धरना भी दिया।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि रोक के बाद भी 50 हजार मार्कशीट छापी गई है। इसके एवज में स्टूडेंटों से पैसा भी लिया गया। कर्मचारियों का हक मारकर अब शिक्षकों को दिया जा रहा है। कॉपी जांचने और पेपर सेट करने का मेहनताना बढ़ा दिया गया। कर्मियों पर कोई ध्यान नहीं है।
हर साल बीए, बीएससी और बीकॉम की 14 लाख मार्कशीट छपती थीं, जिसे सत्यापित करने का मेहनताना कर्मचारियों को दीपावली तक मिल जाता था। इस बार ऐसा नहीं हो सका। कर्मचारी नेता बसंत सिंह और अवधेश कनौजिया ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन को आड़े हाथों लिया और कहा कि कर्मचारियों के अहित का काम हो रहा है। इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।