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धर्मनगरी के विकास में राष्ट्रपति करें पहल तो बनेगा काम

Sun, 07 Jan 2018 07:56 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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आठ जनवरी को राष्ट्रपति दीनदयाल शोध संस्थान और जगद्गुरुरामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय आ रहे हैं
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चित्रकूट में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के धर्मनगरी आने का इंतजार सिर्फ प्रशासन व छात्रों को ही नहीं बल्कि साधू संतों को भी है। क्षेत्र के साधुसंतों का मानना है कि यूपी एमपी क्षेत्र के मध्य बसी इस धर्मनगरी का सही तरीके से विकास कराने में राष्ट्रपति यदि हस्तक्षेप करेंगे तो सब काम बन जाएगा। यूपी एमपी के मुख्यमंत्रियों ने तो अपने दौरे में फ्री-जोन बनाने की घोषणा की थी लेकिन उस पर अभी अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। मंदाकिनी को प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए भी पहल कराने की मांग की जाएगी। 
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 आठ जनवरी को राष्ट्रपति दीनदयाल शोध संस्थान और जगद्गुरुरामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय आ रहे हैं। राष्ट्रपति के रूप में पहली बार धर्मनगरी आने को लेकर यहां के समाजसेवियों के अलावा मंदिर मठ के साधू संत भी उत्साहित हैं। शनिवार को जानकीकुंड स्थित जानकीमहल के महंत रामजी दास ने बताया कि संतों की ओर से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा जिसमें इस क्षेत्र को फ्री-जोन घोषित किए जाने के बाद की प्रक्रिया को जल्द शुरू कराने की मांग की जाएगी। फ्री-जोन होने से यूपी एमपी क्षेत्र के लोगों को भारी राहत मिलेगी। गौरतलब है कि मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने चित्रकूट दौरे पर तीर्थक्षेत्र का समुचित विकास कराने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं को हरी झंडी दी थी। इस क्षेत्र के फ्र ी-जोन भी घोषित करने को कहा था। प्रमोदवन के संत आनंददास ने कहा कि इस क्षेत्र की मंदाकिनी नदी जीवनदायनी है। इसमें कुछ माह बाद प्रदूषण बढ़ जाता है। जिससे पूरे क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति भी बाधित होती है। इस क्षेत्र की नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की सार्थक पहल कराने की मांग की जाएगी। साधुसंतों के अलावा समाजसेवी बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह व पर्यावरण के प्रति चिंतिंत रहने वाले अरूण कुमार गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रपति से मंदाकिनी नदी के अलावा तीर्थ क्षेत्र के परिक्रमा मार्ग को भी प्रदूषण मुक्त बनवाने के लिए पहल कराने की मांग की जाएगी।

जगद्गुरू रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट में पढ़ने वाले छात्र- छात्राओं में राष्ट्रपति व राज्यपाल के आगमन को लेकर खासी खुशी दिख रही है। उपाधि पाने वाले छात्र-छात्राओं ने अमर उजाला से मन की बात की। सभी का एक स्वर में कहना था कि सरकारी नौकरियों में दिव्यांगों का आरक्षण और बढ़ाया जाए जिससे शिक्षित दिव्यांग आत्मनिर्भर बन सके। यह भी कहा कि सरकार हमेशा दिव्यांगों के हित की बात टीवी-अखबार व मंचों पर करती है लेकिन जमीनी स्तर की हकीकत दूसरी है। 
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छात्राओं के मन की बात
छात्रा रमुनी महतों का कहना है कि दिव्यांग नाम देने से काम नहीं चलेगा। निशक्तों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाए। छात्रा दीपा व सुषमा ने कहा कि सरकारी नौकरियां में निशक्तों के लिए आरक्षण बढ़ाया जाए। सुफीया बानो ने कहा कि निशक्तों के लिए जो प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं उस कार्य में पारदर्शिता लाई जाए। निशक्तों की जगह सकलांगों के प्रमाण पत्र बना दिए जाते हैं।  

छात्रों की मन की बात
छात्र मनोज यादव ने बताया कि वह चाहता है सरकार विकलांग विश्वविद्यालय को केंद्रीय विद्यालय का दर्जा कर दें। जिससे विकलांगों के लिए पढ़ाई में और सुविधा मिल सके। मनीष झा ने कहा कि निशक्तों को राजनीति में भी भागीदारी देने के लिए लोकसभा व विधानसभा की सीटो में चुनाव लड़ने के लिए सीटोें आरक्षण दिया जाए। नागेंद्र व लवकुश सिंह,जितेंद्र पांडेय ने कहा कि रोजगार के लिए अवसर बढ़ाए जाए।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के धर्मनगरी के दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। जिसको लेकर एक बार फिर से आरोग्धाम परिसर की चर्चा होने लगी हैं। विख्यात समाज सेवी नाना जी देशमुख ने धर्मनगरी में दीन दयाल शोध संस्थान के माध्यम से कई कार्य किया था। जिससे प्रभावित होकर देश के कई दिग्गज राजनैतिक दल के नेता व उद्योग पति, समाज सेवी आ चुके हैं। एक बार फिर से इस स्थान पर राष्ट्रपति के आगमन से यह स्थान चर्चा का विषय बना है।   यहां पर इसके पहले भी 2005 में पूर्व राष्ट्रपति स्व.डॉ.अब्दुल कलाम,उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत, सहित पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर सिंह व केंद्र सरकार के कई मंत्रियाें व उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, सहित कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री व मंत्री आ चुके हैं। इसके साथ ही यहां पर उद्योग पति रतन टाटा, मुसलीवाडिया व कई अन्य उद्योग पति आ चुके हैं। 

विश्व पटल पर इस क्षेत्र की निगाह रहेगी
कामदगिरी प्रमुख द्वार के महंत रामस्वरूपाचार्य ने कहा कि राष्ट्रपति व राज्यपाल का एक साथ धर्मनगरी में आने पर स्वत: ही विकास होगा। अनुसुइया आश्रम के महंत चोला बाबा व जानकीकुंड के महंत सीताशरण दास ने कहा कि धर्मनगरी में दोनों के आने से विश्व पटल पर इस क्षेत्र की निगाह रहेगी। गुप्त गोदावरी के मंहत बालकदास और हनुमानधारा के मंहत जीवनदास ने कहा कि राष्ट्रपति से मंदाकिनी नदी को प्रदूषण मुक्त बनवाने की मांग की जाएगी।
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