समधन/कन्नौज। खेतों में दिन-रात मेहनत कर आलू की फसल तैयार करने वाले किसानों के सामने अब लागत निकालने का संकट खड़ा हो गया है। बाजार में आलू के दाम काफी कम हो गए हैं। इस कारण लागत वसूलना भी मुश्किल हो गया है। कोल्ड स्टोरेज में खरीदारों की कमी से किसान परेशान हैं और समझ नहीं आ रहा कि आलू किसे बेचें। यदि यही स्थिति रही तो कई किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
मलिकपुर स्थित कोल्ड स्टोरेज में एक-दो खरीदार ही नजर आए। किसानों को उम्मीद थी कि भंडारित आलू बेचकर राहत मिलेगी लेकिन मौजूदा भाव ने चिंता बढ़ा दी है। आलू के भाव 100 से 325 रुपये प्रति पैकेट हैं। कंचन किस्म का आलू 170 से 180 रुपये, हालैंड 200 से 225 रुपये, जी-चार किस्म 300 से 325 रुपये तथा सफेद आलू 100 से 150 रुपये प्रति पैकेट (53 किलो) बिक रहा है। कम कीमत के कारण किसान लागत और भंडारण खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
कोल्ड स्टोरेज में आलू बेचने की प्रक्रिया भी किसानों के लिए परेशानी बनी है। व्यापारी से भाव तय होने के बाद आलू बाहर निकलवाया जाता है। फिर छंटाई कर सड़ा-गला और कटा-फटा आलू अलग किया जाता है। अच्छी गुणवत्ता वाले आलू को 53 किलो के पैकेट में भरने के बाद ही पैकेटों की संख्या के आधार पर भुगतान किया जाता है। खराब आलू की कीमत नहीं मिलती जबकि भंडारण का बकाया किराया किसान को ही देना पड़ता है।
एक माह में खाली करने होंगे कोल्ड स्टोरेज
कनीशा कोल्ड स्टोरेज के मुनीम नितिन कुमार ने बताया कि भंडारण की अवधि समाप्त होने में एक महीना शेष है। दिसंबर में अवधि पूरी होने के बाद किसानों को आलू निकालने के लिए सूचित किया जाएगा। इसके बाद भी न निकालने पर आलू बाहर निकलवा दिया जाएगा। किसान महीपाल सिंह, वीरेंद्र कुमार मौर्य, अजीतपाल सिंह, अनुज कुमार आदि ने आशंका जताई कि भाव में गिरावट से सभी किसान कर्ज में डूब जाएंगे और परिवार के खर्च को लेकर भविष्य में संकट खड़ा हो सकता है।
वर्जन
कोल्ड स्टोरेज में भंडारित आलू की 70 फीसदी निकासी हो चुकी है। अभी एक महीने का समय है, जिसमें और निकासी की उम्मीद है। -आशीष कटियार, जिला उद्यान अधिकारी