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ये है रहस्यमयी महाभारत काल का तालाब, वरदान है इसका जल

Fri, 17 Mar 2017 09:49 AM IST
धीरज अग्निहोत्री/राजीव चतुर्वेदी, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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फर्रुखाबाद के रहस्मयी तालाब की कहानी
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यूपी में एक ऐसा रहस्मयी तालाब बना हुआ है जहां का पानी लोगों के लिए वरदान है। ऐसी मान्यता है कि इस तालाब का निर्माण महाभारत काल में कराया गया था। फर्रुखाबाद के गांव नगला नान में बने इस चिंतामणि तालाब का पानी आजतक नहीं सूखा है। तालाब के अंदर 7 कुएं बने हुए हैं। अंदर ही अंदर व किनारे पक्की सीढ़ियां बनी हैं। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पांडवों ने एक साल का अज्ञातवास इस तालाब के किनारे रहकर भी काटा था। यहीं पर द्रौपदी और पांडव स्नान कर भगवान शंकर और हनुमान की पूजा करते थे। बाद में ये मुगल शासकों का पसंदीदा तालाब बन गया। तालाब पर बने गुंबदों में उर्दू भाषा में कुछ आयतें लिखी गई थीं। जो आज भी साफ देखी जाती हैं। 
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राजा चिंतामणि का कोढ़ यहां हो गया था ठीक

डेमो पिक
फर्रुखाबाद जिले की सीमा से करीबन 10 किलोमीटर दूर स्थित गांव नगला नान में महाभारत कालीन का तालाब बना है। यहां के लोग बताते हैं कि राजा चिंतामणि को कोढ़ था। वह गंगा नहाने के लिए हरिद्वार जा रहे थे। नगला नान के पास राजा चिंतामणि ने शौच के बाद तालाब स्नान किया तो उन्हें कोढ़ में कुछ लाभ मिला। इस पर उन्होंने रोजाना तालाब में स्नान करना शुरू कर दिया, जिससे उनका कोढ़ का रोग ठीक हो गया। इसके बाद राजा ने इसका जीर्णोद्घार कराया तो इसका नाम राजा चिंतामणि तालाब पड़ गया। तालाब को भरे जाने की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि इस तालाब में स्नान करने से कोढ़ रोग खत्म हो जाता है। दूर-दराज से कोढ़ रोग से पीड़ित लोग इस तालाब में स्नान करने आते हैं। तालाब किनारे बने शंकर व हनुमान मंदिर में सच्चे मन से मन्नत मांगने पर पूर्ण होती है।

दूर-दूराज के लोग यहां आते हैं

डेमो पिक
राजा चिंतामणि तालाब किनारे हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा, माघी पूर्णिमा और ज्येष्ठ दशहरा को मेला लगता है। इस मेले में एटा, मैनपुरी, शाहजहांपुर, हरदोई, बदायूं और कांशीराम नगर आदि जिलों से श्रद्घालु आकर अपने बच्चों का मुंडन और अन्न प्रासन आदि कार्यक्रम करते हैं।

जीर्णोद्घार को सिर्फ एक बार मिली सरकारी मदद

दयानंद
नगला नान निवासी दयानंद चतुर्वेदी बताते हैं कि फर्रुखाबाद में रहने वाले उनके रिश्तेदार को कुष्ठ रोग था, जिन्होंने इस तालाब में आकर रोजाना स्नान किया और उनका कुष्ठ रोग खत्म हो गया। तालाब के जीर्णोद्घार के लिए कोई सरकारी इम्दाद नहीं मिली। सिर्फ एक बार पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार ने 11 लाख रुपये जीर्णोद्घार के लिए दिए थे।

नहीं मारने दी जाती मछली

सुरेश चंद्र
सुरेशचंद्र (70) बताते हैं कि स्नान करने के बाद वहां बने शंकर व हनुमान मंदिर में पूजन कर सच्चे मन से जो भी मनोकामना मांगी जाती है। वह पूर्ण होती है। इसीलिए यहां हर साल कई जिलों से लोग आकर मन्नत पूरी होने पर पूजन-अर्चन करते हैं। तालाब में क्विंटलों मछलियां हैं लेकिन इनका शिकार नहीं करने दिया जाता है।
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पुरातत्व विभाग के लोग ले जा चुके मिट्टी

रामनरेश
रामनरेश अवस्थी (60) कहते हैं कि तीन-चार बार पुरातत्व विभाग के लोग आकर तालाब की मिट्टी व ककैय्या ईंट ले जा चुके हैं। तालाब किनारे हर साल ग्रामीणों के सहयोग से कथा कराई जाती है। उन्होंने कहा कि महाभारत कालीन के इस तालाब के जीर्णोद्घार के लिए जिला प्रशासन को पहल करनी चाहिए। तालाब में किसी को कपड़े नहीं धोने दिए जाते हैं। तालाब की देखभाल ग्रामीण मिलकर करते हैं।
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