क्या औरत क्या आदमी, यह तो गुंड़ा पारिवार है.. इसलिए पूरा इलाका इस परिवार से खौफ खाता है। आप भी इस परिवार की करतूत जानेंगे तो शायद...
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पुलिस के साथ मारपीट के आपने कई किस्से सुने होंगे पर ऐसा वाकया शाय़द ही आपने सुना हो। एक तो किसी सह-यात्री के साथ ऐसी हरकत की औ्रर ऊपर से गुनाह कबूलने की जगह बेखौफ होकर पुलिसवाले की जमकर पिटाई की। मतलब एक तो चोरी ऊपर से सीना-जोरी......क्या कहने...!
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उत्तर प्रदेश के झींझक इलाके के कंचौसी बाजार का खोया कारोबारी मुकुंदी कंचौसी रेलवे स्टेशन से फुकुआबाद कानपुर पैसेंजर सवार होकर खोया लेकर जा रहा था। रास्ते में ट्रेन परजनी हाल के पास धीमी हो गई। यहां परजनी गांव के सुनिल दिवाकर और चांद सिंह राजपुत ने ट्रेन से उसकी खोये से भरी डलिया छीनकर नींचे फेंक दी और खुद भी ट्रेन से कूद गए। उनके पीछे-पीछे कारोबारी पंकज भी ट्रेन से उतर गया।
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पकंज ने अपने साथ हुई इस घटना की सूचना तुरंत अपने छोटे भाई को दी। उसके भाई ने उसे उस वक्त वापस लौट कर आने के लिए कह दिया। अगले दिन पंकज का भाई एक सिपाही दिगंबर के साथ आरोपियों को तलाशते हुए उनके घर तक जा पहुंचा। जैसे ही आरोपी परिवार ने घर का दरवाजा खटखटाया भीतर से चार-पांच मुशटंडे और कुछ महिलाएं बाहर निकली। उन्होंने बाहर निकलते ही पकंज और हवलदार दिगंबर पर ताबड़तोड़ हमला करना दिया। यह देख पंकज घबरा गया और वहां से उल्टे पांव जानबचाकर दौड़ गया। जबकि हवलदार दिगंबर को आरोपियों ने बंधक बना लिया।
गुंडे परिवार ने सिपाही की मारमारकर बुरी हालत कर दी। चीख-पुकार सुनकर बाद में इलाके के लोगों ने स्थानीय पुलिस को इसकी खबर दी। सूचने मिलते ही मगंलपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। तब तक आरोपी मौके से फरार हो गए। स्थानीय पुलिस ने हवलदार को छुड़ाया और पूछताछ कर ज्ञान सिंह, सुनिल, राजकुमार, पूना, सुनील कुमार और उमेद समेत अज्ञात महिलाओं के नाम मुकदमा दर्ज कर किया। आरोपियों पर धारा 332, 342, 353, 504, 323 सिविल क्रिमिनल एक्ट के तहत मुकद्दमा दर्ज कर लिआ है।