बता दें द मुथूट ग्रुप ने भी अपने सीएसआर (कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड से अस्पताल की सुविधाएं बढ़ाने में सहयोग किया है। कोरोना की दूसरी लहर में कई पुलिस वालों को भी इलाज के लिए भटकना पड़ा था। तब पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने इस सामान्य अस्पताल को कोविड अस्पताल के रूप में तैयार कराया था।
कानपुर में पुलिस लाइन में बना पुलिस अस्पताल कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने को पूरी तरह से तैयार है। रविवार को डीजीपी मुकुल गोयल ने इसका उद्घाटन किया। अब यहां जिले (कमिश्नरी और आउटर) के सात हजार पुलिसकर्मी और उनके परिजनों को इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
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जरूरत पड़ने पर आसपास के जिलों के पुलिसकर्मियों को भी इलाज की सुविधा मिलेगी। भविष्य में यहां शुरू होने वाली पॉलीक्लीनिक में कोरोना से इतर मरीजों का भी इलाज किया जाएगा। बता दें द मुथूट ग्रुप ने भी अपने सीएसआर (कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) फंड से अस्पताल की सुविधाएं बढ़ाने में सहयोग किया है।
कोरोना की दूसरी लहर में कई पुलिस वालों को भी इलाज के लिए भटकना पड़ा था। तब पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने इस सामान्य अस्पताल को कोविड अस्पताल के रूप में तैयार कराया था। यहां सामान्य मरीजों के साथ ही शुरुआती लक्षणों वाले कोरोना मरीजों का भी इलाज किया जाता था।
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अब इस अस्पताल को और सुविधायुक्त किया गया है। अब डीजीपी ने इसका शुभारंभ किया है। उन्होंने अस्पताल परिसर का भ्रमण कर अफसरों के इस प्रयास की सराहना भी की। खासकर पुलिस कमिश्नर और एडीसीपी साउथ डॉ. अनिल कुमार की। इन दोनों अफसरों ने कोविड की दूसरी लहर के दौरान अस्पताल को फौरी तौर पर शुरू कर कोविड मरीजों का इलाज शुरू कराया था।
सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते, ऐसे प्रयास जरूरी
डीजीपी ने बताया कि दो साल तक वे कानपुर डीआईजी रेंज रह चुके हैं। उनको पता है कि यहां की जनता ऐसे कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है। सब कुछ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते। इस तरह के प्रयास जरूरी हैं। इसका सकारात्मक असर रहा और अस्पताल बनकर तैयार हो गया।
ये हमेशा काम आएगा। जरूरत है कि इसका विस्तार लगातार करते रहें। उन्होंने कहा कि अन्य जनपदों की पुलिस लाइन में भी इसी तरह से अस्पताल बनाए जाएंगे। कहीं-कहीं बन भी गए हैं। अगर तीसरी लहर आती है तो इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उद्घाटन के दौरान महापौर प्रमिला पांडेय, पुलिस कमिश्नर असीम अरुण, मंडलायुक्त राज शेखर, एडीजी भानु भास्कर, आईजी मोहित अग्रवाल समेत अन्य पुलिस-प्रशासन के अफसर मौजूद रहे।
सहयोग करने वालों को सम्मान
पुलिस अस्पताल बनाने में एडीसीपी साउथ डॉ. अनिल की मुख्य भूमिका रही। क्योंकि वह खुद एमबीबीएस डॉक्टर हैं। डीजीपी ने एडीसीपी की प्रशंसा की। वहीं अस्पताल को बनाने में सहयोग करने वाले द मुथूट फाइनेंस कंपनी हिमाचल प्रदेश के पूर्व डीजीपी संजय कुमार और नागेंद्र मिश्रा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मनित किया। आईएमए के पदाधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य तमाम डॉक्टरों का सहयोग अस्पताल बनाने में रहा है।
पुलिस अस्पताल की व्यवस्थाएं
एडीसीपी अनिल कुमार ने बताया कि अस्पताल में 16 बेड हैं। सभी पर ऑक्सीजन उपलब्ध है। बच्चों के लिए तीन बेड रिजर्व रखे गए हैं। दूसरी लहर में अस्पताल में 46 मरीज भर्ती हुए। सात को रेफर किया गया, जबकि 39 मरीजों का सफल इलाज हुआ। उन्होंने बताया कि टेलीमेडसिन के जरिये 1020 मरीजों को स्वस्थ किया गया। 900 कोविड टेस्ट किए गए। पुलिस कमिश्नर का कहना था कि भविष्य में अस्पताल को पॉलीक्लीनिक के रूप में चलाने की योजना है। जरूरत पड़ने पर 12 और बेड बढ़ाए जा सकेंगे।