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पुलिस का खेल: खनन माफिया और बिधनू पुलिस की सांठगांठ, नहीं लगाया था एससी-एसटी एक्ट

Sun, 24 Oct 2021 12:39 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर में अवैध खनन में पुलिस का खेल सामने आया है। ये पूरा खेल पुलिस और खनन माफिया ने मिलीभगत कर किया था। क्योंकि उनको पता था कि अगर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की तो गिरफ्तारी करनी पड़ेगी।
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अवैध मिट्टी खनन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में अवैध खनन के मामले में बिधनू पुलिस का बड़ा खेल उजागर हुआ है। पिछले साल दर्ज किए गए अवैध खनन के केस में पुलिस ने आरोपियों पर एससी-एसटी एक्ट ही नहीं लगाया था। केवल अवैध खनन अधिनियम के तहत केस दर्ज कर जांच पूरी की और चार्जशीट लगा दी।
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इस वजह से आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। ये पूरा खेल पुलिस और खनन माफिया ने मिलीभगत कर किया था। क्योंकि उनको पता था कि अगर एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की तो गिरफ्तारी करनी पड़ेगी। दरअसल, तीन दिन पहले राज्यमंत्री छत्रपाल सिंह सदर तहसील पहुंचे थे।

यहां पर रमईपुर निवासी बुजुर्ग राज नारायण ने उनसे शिकायत की थी कि खनन माफिया ने उनके खेत खोदकर जमीन छलनी कर दी है। मामले में जब अमर उजाला ने पड़ताल की तो अहम तथ्य उजागर हुआ। जानकारी हुई कि 23 दिसंबर 2020 को बिधनू पुलिस ने राज नारायण की तहरीर पर खनन माफिया शीलू और अनूप पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
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ये दोनों भी रमईपुर के रहने वाले हैं। मुकदमा अवैध खनन अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था। हैरानी की बात यह है कि राज नारायण दलित हैं इसके बावजूद पुलिस ने केस में एससी-एसटी एक्ट नहीं लगाया। विवेचना में भी एक्ट नहीं जोड़ा गया। पुलिस ने केवल अवैध खनन अधिनियम के आरोप में ही चार्जशीट दाखिल कर दी।

एससी-एसटी एक्ट न लगाने से स्पष्ट है कि पुलिस की मिलीभगत खनन माफिया से सीधे तौर पर रही है। यही वजह है कि खनन माफिया बेअंदाज हैं और आज भी खनन में लगे हुए हैं। केस की विवेचना करने वाले दरोगा दीपक सिंह पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 

एससी-एसटी एक्ट क्यों नहीं लगाया गया है इसकी जांच कराई जाएगी। अगर किसी तरह की मिलीभगत या लापरवाही मिलती है तो विवेचक व जो भी अन्य जिम्मेदार होंगे उन पर कार्रवाई होगी।
आदित्य कुमार शुक्ला, एएसपी कानपुर आउटर

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