ये दोनों भी रमईपुर के रहने वाले हैं। मुकदमा अवैध खनन अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था। हैरानी की बात यह है कि राज नारायण दलित हैं इसके बावजूद पुलिस ने केस में एससी-एसटी एक्ट नहीं लगाया। विवेचना में भी एक्ट नहीं जोड़ा गया। पुलिस ने केवल अवैध खनन अधिनियम के आरोप में ही चार्जशीट दाखिल कर दी।
एससी-एसटी एक्ट न लगाने से स्पष्ट है कि पुलिस की मिलीभगत खनन माफिया से सीधे तौर पर रही है। यही वजह है कि खनन माफिया बेअंदाज हैं और आज भी खनन में लगे हुए हैं। केस की विवेचना करने वाले दरोगा दीपक सिंह पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
एससी-एसटी एक्ट क्यों नहीं लगाया गया है इसकी जांच कराई जाएगी। अगर किसी तरह की मिलीभगत या लापरवाही मिलती है तो विवेचक व जो भी अन्य जिम्मेदार होंगे उन पर कार्रवाई होगी।
आदित्य कुमार शुक्ला, एएसपी कानपुर आउटर