पुलिस ने पहले सगे भाइयों पर सामूहिक दुष्कर्म की धारा में केस दर्ज कर जेल भेजा था। उसके बाद उनकी मां व यतीमखाना मैनेजर को आरोपी बनाया था। बजरिया इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि इन दोनों पर साक्ष्य मिटाने व साजिश में शामिल होने से संबंधित साक्ष्य पाए गए हैं।
अनाथालय व यतीमखाना का नाम बदलने के लिए लिखा पत्र
शहर में अनाथालय और यतीमखाना दोनो हैं। प्रदेश के लगभग हर शहर में होते हैं। एडीसीपी पश्चिम लखन सिंह यादव ने राज्य बाल आयोग को एक पत्र लिखा है। उसके जरिये कहा है कि अनाथालय व यतीमखाना, ऐसे शब्द हैं जिनसे हीनभावना आती है।
इसका नाम बाल सदन या कुछ इसी तरह का हो तो काफी अच्छा लगेगा। आयोग ने नाम बदलने के प्रस्ताव को राज्य सरकार को भेजा है। राज्य सरकार की मंजूरी मिलते ही नाम तय हो जाएगा। इससे समाज में फैली हीन भावना समाप्त हो जाएगा।
ये है पूरा मामला
यतीमखाना में रह रही 16 वर्षीय किशोरी ने 14 अगस्त की रात हाथ की नस काट ली थी। इसी दौरान उसने बताया था कि नाला रोड निवासी दंपति महबूब व उनकी पत्नी शाहजहां 2015 में उसको बांदा के यतीमखाना से गोद लेकर आए थे।
उनके बेटे सऊद व दाउद ने दो वर्षों तक दुष्कर्म किया था। परिजनों को जानकारी होने पर 2019 में कर्नलगंज में स्थित यतीमखाना में उसको डाल दिया था। आरोपी सगे भाइयों को पुलिस ने बुधवार को जेल भेज दिया था। शाहजहां को भी पुलिस ने आरोपी बनाया है। उसे जेल भेजा गया था, हालांकि थाने से जमानत मिल गई है।