करोड़ों की ठगी करने के आरोपी विष्णु बाबू दिवाकर को कानपुर आउटर पुलिस गिरफ्तार करने में नाकाम है। पिछले छह महीने से वह फरार चल रहा है। अब जाकर पुलिस उसके खिलाफ केवल गैर जमानती वारंट ले सकी है। आशंका है कि पुलिस की मिलीभगत की वजह से आरोपी फरारी काट रहा है। जानबूझकर पुलिस लापरवाही बरत रही है।
सचेंडी के सीढ़ी इटारा गांव निवासी विष्णु बाबू दिवाकर खुद को संघ का बड़ा पदाधिकारी बताकर भाजपा नेताओं से ठगी कर चुका है। किसी को भाजपा में पदा दिलाने तो किसी को चुनाव में टिकट दिलाने के नाम पर करोड़ों ठगे हैं। कई बेरोजगारों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये ऐंठें।
जुलाई में मेरठ निवासी भाजपा नेत्री ने 50 लाख की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। 29 नवंबर को 5 लाख की ठगी का केस दर्ज हुआ और तीन चार अन्य शिकायतें भी ठगी की मिलीं। जिनको मुकदमे में शामिल किया गया है। हैरानी की बात यह है कि छह महीने से पुलिस विष्णु दिवाकर को तलाश नहीं सकी है।
पीड़ित लोगों का आरोप है कि पुलिस की आरोपी के साथ मिलीभगत है। यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी नहीं कर रही है। सीओ सदर ऋषिकेश यादव ने बताया कि आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट ले लिया गया है। तलाश भी की जा रही है। अगर जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई तो कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।
चार केस हैं दर्ज, एडीजी का आदेश भी बेअसर
कानपुर देहात के डेरापुर थाने में 2014 में शीलू देवी और 2018 में सुनीता कुमारी ने विष्णु बाबू के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। इस साल उसके खिलाफ सचेंडी में दो केस दर्ज किए जा चुके हैं। जब इसकी शिकायत जुलाई में एडीजी से पीड़ितों ने की थी तब एडीजी ने एसपी आउटर को निर्देश दिए थे कि जल्द से जल्द आरोपी की गिरफ्तारी करें। गैंगस्टर लगाकर अवैध संपत्ति जब्त करें। मगर पुलिस ने कार्रवाई में एक कदम आगे नहीं बढ़ाया।
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