इस दौरान चपरासी ने प्रबंधक मनोज सिंह को बताया कि वर्ष 2014 में कुछ लॉकर पीएनबी की जागेश्वर शाखा में शिफ्ट हुए थे। इसके बाद रमेशचंद्र दोनों बेटों के साथ जागेश्वर शाखा पहुंचे। यहां उन्हें लॉकर नंबर जेसी-20 दिखा। हालांकि बताया गया कि यह दो महिलाओं के नाम आवंटित है।
आरबीआई, जनलोकपाल तक शिकायत पर मदद नहीं मिली
पीड़ित ने बैंक की मुख्य शाखा, रिजर्व बैंक, जनलोकपाल में शिकायत की, लेकिन कहीं से भी उन्हें मदद नहीं मिली। तब उन्होंने डीसीपी साउथ से गुहार लगाई। उनके आदेश पर नौबस्ता थाने में अमानत में खयानत, धोखाधड़ी, कूटरचना करना आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई।
शुक्रवार को पिता-पुत्र विवेचक विराट नगर चौकी प्रभारी उदय प्रताप सिंह से मिले और बयान दर्ज कराए। थाना प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि विवेचक ने बैंक प्रबंधन से बैंक कर्मियों की लिस्ट ले ली थी। बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया है।
चाभी लिए घूमते रहो, देखते हैं कितना दौड़ोगे
पीड़ित के बेटे अनीश ने बताया कि जब वे जनलोकपाल गए, तो लखनऊ के डीजीएम का फोन आया। आरोप लगाया कि उन्होंने फोन पर कहा कि लिखकर दे दो कि कोई कार्रवाई नहीं करनी है। मना करने पर बोले कि फिर चाभी लेकर घूमते रहो... देखते हैं कितना दौड़ोगे। लड़ते रहो कोर्ट में केस।