इस बार पितृपक्ष दो सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर तक चलेंगे। 17 सितंबर को सर्वपितृ विसर्जन अमावस्या है। पितृपक्ष में जो लोग पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं वे लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा का सेवन न करें। साथ ही 15 दिनों तक दाढ़ी-बाल न बनवाएं।
कोरोना महामारी के चलते गंगा तट पर न जाकर घर पर ही पितरों को जलदान करें। पंडित केए दुबे पद्मेश का कहना है कि भाद्रपद महीने की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पितृपक्ष रहता है। इस बार पितृपक्ष दो सितंबर से 17 सितंबर तक हैं। ज्योतिष सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य पवन तिवारी का कहना है कि पितृपक्ष में पितरों का तर्पण करना बहुत ही अच्छा होता है।
पितृ पक्ष में पितर देव स्वर्गलोक से धरती पर परिजनों से मिलने आते हैं। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है जिन प्राणियों की मृत्यु के बाद उनका विधिनुसार तर्पण नहीं किया जाता है उनकी आत्मा को मुक्ति नहीं मिलती है। पितृपक्ष में पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने का विशेष महत्व होता है। जो भी अपने पितरों को तर्पण नहीं करता है उन्हें पितृदोष का सामना करना पड़ता है। ऐसे दोष की स्थिति में परिजनों को धन, सेहत और अन्य कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है।