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बांदा: केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ 15 गांव के लोगों ने खोला मोर्चा, लगाया ये आरोप

Wed, 06 Apr 2022 09:31 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि प्रभावित गांवों में ज्यादातर आदिवासी ग्रामीण हैं। प्रशासन ने उनकी कोई राय नहीं ली। न ही ग्राम सभाएं आयोजित कीं। इस परियोजना से बहुत बड़ा पर्यावरणीय नुकसान होने जा रहा है।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे मध्य प्रदेश के 15 गांवों के लोगों ने बैठक कर केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी हुए 60 दिन हो गए, लेकिन प्रभावित गांवों के सरपंच और जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
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अधिकारी मौका मुआयना कर रहे हैं तब पता चल रहा है कि परियोजना के दायरे में उनके गांव भी आ रहे हैं। आम बजट में केंद्र सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 1400 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसके बाद से परियोजना पर काम आगे बढ़ाने की गतिविधियां शुरू हो गईं।

इधर, मंगलवार को केन-बेतवा परियोजना वाले क्षेत्र के कदवारा (छतरपुर) गांव में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर की अगुवाई में 15 गांवों के ग्रामीण एकत्रित हुए। अमित ने कहाकि परियोजना की अधिसूचना 31 जनवरी को जारी हो चुकी है, लेकिन प्रभावित गांवों के लोगों को कोई जानकारी नहीं दी गई।
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भूमि अधिग्रहण करने वाले स्थानीय अधिकारी से ग्रामीणों ने शिकायत की तो वह भड़क उठे। ग्रामीणों ने कहा कि अधिसूचना में कहा गया है कि भूमि का नक्शा व प्लान का निरीक्षण, अनु विभागीय या भू अर्जन अधिकारी, बिजावर के कार्यालय में किया जा सकता है।

ग्रामीणों को यह कुछ बताया या दिखाया नहीं जा रहा है। तीन अप्रैल को विभागीय अधिकारी सिर्फ दो गांवों में गए। वहां भी ग्रामीणों को विस्थापन या उनके पुनर्वास संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गई। ग्रामीणों ने कहाकि प्रशासन की यह मनमानी प्रभावित ग्रामीणों को स्वीकार नहीं है।
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ग्राम सभाओं और जन सुनवाई के नाम पर कागजी खानापूर्ति हो रही है। कड़ी मेहनत और मशक्कत से कई सालों के बाद ग्रामीणों ने अपने घर और खेत बनाए हैं। कठिन जीवन के बाद अब जब कुछ व्यवस्थित हो पाएं हैं तो सरकार उन्हें उजाड़ने जा रही है। उनसे राय लेना तो दूर, जानकारी तक नहीं दी जा रही। 

परियोजना से बड़ा पर्यावरणीय नुकसान
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि प्रभावित गांवों में ज्यादातर आदिवासी ग्रामीण हैं। प्रशासन ने उनकी कोई राय नहीं ली। न ही ग्राम सभाएं आयोजित कीं। इस परियोजना से बहुत बड़ा पर्यावरणीय नुकसान होने जा रहा है। प्रशासन उन्हें मजबूर न करें। ग्रामीण संघर्ष नहीं चाहते। कानूनी प्रक्रिया से समस्या का समाधान चाहते हैं। 

सरपंचों को सूचना न होने का मलाल
परियोजना से प्रभावित क्षेत्र नौगवां गांव के सरपंच रामदयाल आदिवासी ने बताया कि अधिसूचना के बारे में अभी गांव को कोई जानकारी नहीं है। कदवारा गांव के सरपंच भगवती अहिरवार ने कहा कि किसानों के साथ न्याय होना चाहिए। 
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