कानपुर नगर निगम गंगा की तरह पांडु नदी में भी गंदगी जाने से रोकेगा। बायोरेमेडीएशन तकनीक से यह कार्य नवंबर में शुरू होगा। इसके लिए मद्रास की कंपनी को कार्यादेश जारी किया गया है। इस कार्य में एक साल में करीब एक करोड़ पर खर्च होंगे। एनजीटी की सख्ती पर यह कार्रवाई की जा रही है।
नगर निगम ने पांडु नदी में गिरने वाले सबसे बड़े नाले सीओडी नाले को डेढ़ साल पहले टैप किया था। इसका पानी बिनगवा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में जा रहा है, जबकि रफाका नाला, हलवाखाडा नाला, आईसीआई नाला और पनकी नाले से रोज करीब साढे आठ करोड़ लीटर गंदा पानी पांडु नदी में जा रहा है।
इससे न सिर्फ इस नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है बल्कि प्रदूषण की वजह से बुलेट ऑक्सीजन कम होने से मछली सहित अन्य जलीय जीव नष्ट हो रहे हैं। एनजीटी की सख्ती के बाद नगर निगम ने ड्रोन से भौती से बिनगवां तक 17 किलोमीटर इलाके में इस नदी में गिर रहे नालों स्थिति देखी।