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गंगा की तरह साफ होगी पांडु नदी, नवंबर में होगी शुरुआत, प्रदूषण से नष्ट हो रहे हैं जलीय जीव

Tue, 29 Sep 2020 09:45 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर नगर निगम गंगा की तरह पांडु नदी में भी गंदगी जाने से रोकेगा। बायोरेमेडीएशन तकनीक से यह कार्य नवंबर में शुरू होगा। इसके लिए मद्रास की कंपनी को कार्यादेश जारी किया गया है। इस कार्य में एक साल में करीब एक करोड़ पर खर्च होंगे। एनजीटी की सख्ती पर यह कार्रवाई की जा रही है।  
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नगर निगम ने पांडु नदी में गिरने वाले सबसे बड़े नाले सीओडी नाले को डेढ़ साल पहले टैप किया था। इसका पानी बिनगवा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में जा रहा है, जबकि रफाका नाला, हलवाखाडा नाला, आईसीआई नाला और पनकी नाले से रोज करीब साढे आठ करोड़ लीटर गंदा पानी पांडु नदी में जा रहा है।

इससे न सिर्फ इस नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है बल्कि प्रदूषण की वजह से बुलेट ऑक्सीजन कम होने से मछली सहित अन्य जलीय जीव नष्ट हो रहे हैं। एनजीटी की सख्ती के बाद नगर निगम ने ड्रोन से भौती से बिनगवां तक 17 किलोमीटर इलाके में इस नदी में गिर रहे नालों स्थिति देखी।  
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पता चला कि सीओडी नाला पूरी तरह टैप है, जबकि चार अन्य नालों से गंदा पानी इस नदी में जा रहा है।   नगर निगम ने इन चारों नालों का पानी बायोरेमेडीएशन तकनीक से शोधित कराने की योजना बनाई। इससे पहले माघ मेले के दौरान गंगा में ना लो का पानी सूचित करने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया गया था।  

नगर निगम के अधिशासी अभियंता (प्रोजेक्ट) आरके सिंह ने बताया कि पांडु नदी में गिर गए चारों नालों के पानी को बायोरेमेडीएशन तकनीकी से शोधित करने का ठेका मद्रास की कंपनी बायोक्सी ग्रीन को दिया है। कंपनी नवंबर से कार्य शुरू करेगी। इस कार्य में 1 साल में लगभग एक करोड़ खर्च आएगा।  

यह है बायोरेमेडीएशन तकनीक  इस तकनीक से गंदे पानी को शोधित करने के लिए इसके नदी में गिरने से पहले विशेष प्रकार के बैक्टीरिया डाले जाते हैं, जो पानी में मिली गंदगी को खासकर सीवेज को अवशोषित कर लेते हैं। इस  दौरान साफ हुआ पानी नदी में बहा दिया जाता है।
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