कानपुर में मयूर वनस्पति के ठिकानों पर डीजीजीआई लखनऊ के छापे में आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। चार साल पुराने इस मामले में कंपनी के मालिक फंस सकते हैं। बयान दर्ज कराने के लिए इन्हें जल्द ही नोटिस जारी करने की तैयारी है। विभाग के अफसरों ने कंपनी के मालिकों से दस्तावेज मांगे हैं। वर्ष 2019 में डीआरआई ने (राजस्व खुफिया निदेशालय) ने मयूर वनस्पति पर छापा मारकर कंपनी के एक निदेशक को गिरफ्तार भी किया गया था।
डीजीजीआई (महानिदेशालय जीएसटी इंटेलिजेंस) लखनऊ की टीम ने मंगलवार को खाद्य तेल कंपनी मयूर वनस्पति के सिविल लाइंस स्थित कार्यालय और रनियां स्थित फैक्टरी पर छापा मारा था। सूत्रों के अनुसार, मयूर समूह खाद्य तेल, आटा-मैदा के अलावा एक बड़ी कंपनी के लिए बिस्कुट भी बनाता है। टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ कर आईटीसी में गड़बड़ी से संबंधित काफी दस्तावेज जब्त किए हैं। किस स्तर पर गड़बड़ी की गई है, इसके लिए जब्त दस्तावेजों और पूर्व में ली गई आईटीसी का मिलान किया जाएगा। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि गड़बड़ी कर कितनी आईटीसी हड़पी गई।
पहले भी हो चुकी है डीआरआई की जांच
25 फरवरी 2019 को डीआरआई (राजस्व खुफिया निदेशालय) कोलकाता और लखनऊ की टीमों ने मयूर वनस्पति के निर्माता सुनील गुप्ता और सुरेश गुप्ता के सिविल लाइंस स्थित आवास पर संयुक्त रूप से छापा मारा था। इसमें पता चला था कि कारोबारी बांग्लादेश के रास्ते थाईलैंड से कच्चा माल (वनस्पति ऑयल) मंगाते थे। थाईलैंड से सीधे आयात पर टैक्स अधिक है, इसलिए इस रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले में कंपनी के एक संचालक को गिरफ्तार भी किया गया था। डीआरआई ने पांच माह पहले भी मयूर की चौबेपुर स्थित फैक्टरी में छापा मारा था। यहां भी टैक्स चोरी का मामला पकड़ा गया था।