कानपुर। चौबेपुर में झोलाछापों के इलाज से तीन मासूमों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद मंगलवार को टूटी। विभाग के अधिकारियों ने चार क्लीनिकों पर छापा मारा। एक क्लीनिक सील किया और दूसरे को बंद कराया। दो अन्य कोा नोटिस दिया। वहीं, रामादेवी स्थित कृपा शंकर अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग ने खानापूरी करते हुए अस्पताल को नोटिस देकर कहा कि जब पंजीकरण हो जाए तब अस्पताल का संचालन करें जबकि इस अस्पताल में रोगी का इलाज भी हो रहा था।
सप्ताह भर में चौबेपुर व आसपास के गांवों में झोलाछाप के इलाज से तीन लोगों की मौत के मामले को संज्ञान में लेकर मंगलवार को चौबेपुर सीएचसी प्रभारी डॉ. यशोवर्धन सिंह के नेतृत्व में चार क्लीनिकों पर छापा मारा गया। टीम बिठूर रोड स्थित आयुष्मान पाली क्लीनिक पहुंची। यहां संचालक एसके मौर्य मौजूद नहीं थे। उन्हें नोटिस दिया गया कि तीन दिन में स्पष्टीकरण दें और साथ में रजिस्ट्रेशन व चिकित्सकों की डिग्री जैसे दस्तावेज भी लेकर आएं। इसके बाद टीम भट्ठा कोठी स्थित मेडिकल स्टोर पर पहुंची। फार्मासिस्ट आदित्य पाल मौजूद नहीं था। मौके पर मौजूद रामकिशोर पाल ने बताया कि फार्मासिस्ट आदित्य पाल खाना खाने गए हैं। इनको नोटिस दिया है कि तीन दिन में अपने दस्तावेज दिखाएं।
इसके बाद टीम पिपरी रोड के एससी यादव के क्लीनिक पर पहुंची। अभिलेख नहीं दिखा पाने पर क्लीनिक को सील कर दिया गया। इसके बाद टीम डॉ. वैशाली के क्लीनिक गई जहां अभिलेख न दिखाने पर सील कर दिया गया। टीम में डॉ. शेख हसनैन, सत्येंद्र वर्मा, विजय दिवाकर व विजय अवस्थी आदि मौजूद रहे। रामादेवी स्थित सनिगवां में स्वास्थ्य विभाग की टीम को बिना पंजीकरण अवैध अस्पताल संचालित होते मिला। एसीएमओ व नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. रमित रस्तोगी की अध्यक्षता में टीम को 10 बेड का अस्पताल संचालित मिला। अस्पताल में एक बेड पर रोगी भी भर्ती मिला। संचालक अस्पताल का लाइसेंस नहीं दिखा पाया। पूछने पर बताया कि आवेदन भी नहीं किया है। उसे नोटिस दिया गया और कहा गया कि वो अपना अस्पताल बंद कर ले।