कारोबारियों ने बताया कि कारोबार में तेजी की संभावना के चलते बढ़े रेट पर माल खरीदा था। लेकिन कोरोना के नए वैरिएंट के खतरे से स्टील कंपनियों ने तेजी से दाम घटाने शुरू कर दिए। इससे कारोबारियों को करोड़ों का घाटा हुआ।
कोरोना के नए वैरिएंट की दस्तक और अचानक मांग में आई कमी ने शहर के लोहा कारोबारियों को करोड़ों को झटका दिया है। दिवाली और छठ के बाद अच्छे कारोबार की उम्मीद में कारोबारियों ने महंगा और बड़े पैमाने पर माल स्टॉक कर लिया।
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तब लोहे के दाम भी बढ़े हुए थे। पिछले एक महीने में लोहा उत्पादों के दामों में 9-10 रुपये किलो की कमी आ गई है। इससे कारोबारियों को तगड़ा नुकसान हो रहा है। अगस्त 2020 में सरिया के दाम 36 रुपये, एचआर क्वाइल के दाम 40 रुपये, काली चादर 41 रुपये और एंगल, गर्डर के दाम 37 रुपये किलो थे।
इसके बाद तेजी से दाम बढ़े। अक्तूबर 2021 में सरिया के भाव 68, एचआर क्वाइल 86, काली चादर 87 और एंगल-गर्डर के दाम 58 रुपये किलो हो गए। कारोबारियों ने बताया कि कारोबार में तेजी की संभावना के चलते बढ़े रेट पर माल खरीदा था। लेकिन कोरोना के नए वैरिएंट के खतरे से स्टील कंपनियों ने तेजी से दाम घटाने शुरू कर दिए। इससे कारोबारियों को करोड़ों का घाटा हुआ।
सरिया और लोहा से जुड़े उत्पादों की मांग बाजार में अचानक कम हो गई हे। बड़ी स्टील कंपनियों ने बीते सालों में तेजी से दाम बढ़ाए। अब मांग में कमी के चलते कंपनियां रेट कम कर रही हैं। इससे इन उत्पादों का स्टाक करने वालों को करोड़ों का नुकसान हुआ है।- उमंग अग्रवाल, अध्यक्ष, इंडियन स्टील फेडरेशन
ओमिक्रॉन और कम मांग के चलते कंपनियां अचानक दाम तेजी से कम कर रही हैं। इसके चलते भाव लगातार कम हो रहे हैं। बीते एक महीने में ही उत्पादों के दाम में 9-10 रुपये किलो की कमी आ गई है।- अतुल द्विवेदी, अध्यक्ष, कानपुर लोहा व्यापार समिति