कानपुर देहात। भोगनीपुर तहसील के चपरघटा में थर्मल पावर प्लांट के नाम पर 400 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में सरकारी धन की जमकर बंदरबाट की गई। स्टेट हाईवे के किनारे स्थित बेशकीमती जमीन पर तीन साल में प्लांट लगाकर बिजली देने का सपना दिखाने वाली कंपनियों ने बैंकों से 1500 करोड़ का ऋण लिया। इसके बाद कंपनियां गायब हो गईं। यह पूरा खेल 15 साल तक चलता रहा। लेकिन अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखी। फिर ऋण अदायगी न होने पर जब बैंक ने जमीन नीलाम की तो यह मामला खुला। माना जा रहा है कि इस घोटाले की तहें अभी खुलनी बाकी हैं। कई जिम्मेदार रडार पर हैं।
चपरघटा क्षेत्र में लगने वाले 1320 मेगावाट क्षमता के पावर प्लांट को तीन वर्ष में बनकर तैयार होना था। इस परियोजना की स्थापना के लिए वर्ष 2010 में जमीन देने की प्रक्रिया शुरू हुई। ऊर्जा अनुभाग-3 लखनऊ के निर्देश पर ग्राम समाज एवं निजी भूमि के पुनर्ग्रहण/अधिग्रहण किए जाने का काम तहसील स्तर पर अधिकारियों ने कराया। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर परियोजना की स्थापना के लिए ग्राम अमिलिया, सिहारी, कछगांव व चपरघटा की जमीन वर्ष 2011 में हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को शर्तों के तहत दी गई। अपर जिलाधिकारी- भू अध्याप्ति, कानपुर नगर ने भूमि का अधिग्रहण कराया। इसी प्रकार ग्राम कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरण्डा व भरतौली में लैंको अनपरा पावर लिमिटेड को शर्तों के तहत भूमि का अधिग्रहण कराया गया। इस तरह सात गांव की अलग-अलग गाटा, रकबा की कुल 2332 एकड़ जमीन 30 साल के लिए दी गई। इसमें कुछ अधिग्रहीत जमीन सीधे कंपनियों के नाम हुई। इसी वक्त तय हो गया था कि दोनों कंपनियां तीन साल में प्लांट की स्थापना कर बिजली उत्पादन करेंगीं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकारी, अधिग्रहीत भूमि आज भी खाली है। कंपनियां भू अध्याप्ति कार्यालय की मिलीभगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर खतौनी में नाम दर्ज कराया। फिर जमीन को बैंक में बंधक करा 1500 करोड़ का ऋण लेकर गायब हो गईं।
ग्रोफास्ट गोल्ड माइंस को नीलाम हुई थी जमीन
तहसील के कछगांव, सिहारी, अमिलिया, चपरघटा की 350.838 हेक्टेयर जमीन को कानपुर नगर की आईडीबीआई बैंक शाखा में बंधक बनाया गया था। इस बैंक से लिए गए ऋण को अदा न कर पाने पर इसकी ई-नीलामी प्रक्रिया कराई गई। चार जनवरी 2024 को बैंक ने नीलामी प्रक्रिया कराई। जमीन को आईडीबीआई बैंक के डीजीएम ने 49.50 करोड़ रुपये में कानपुर की ग्रोफास्ट गोल्ड माइंस एलएलपी कानपुर को नीलाम कर दी। जिसका विक्रय पत्र में उल्लेख किया गया है। नीलाम की गई जमीन हिमावत कंपनी द्वारा बंधक कराई गई थी, इसका विवरण खतौनी में भी दर्ज है। रजिस्ट्री भले ही जनवरी में हो गई हो। लेकिन जांच से अब तक दाखिल खारिज नहीं हो सका है।
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एडीएम ने लगाई जमीन बिक्री पर रोक
आईडीबीआई बैंक से ग्रोफास्ट गोल्ड माइंस को नीलाम करने की जानकारी हुई तो प्रशासन सकते में आ गया। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार ने वर्ष 2011 में पावर प्लांट के लिए हिमावत कंपनी को दी गई अमिलिया, सिहारी, कछगांव, चपरघटा की जमीन पर बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। उनके इस आदेश का उल्लेख खतौनी में भी दर्ज कराया गया। लिखा गया है कि किसी बैंक द्वारा अविधिक रूप से विक्रय पत्र जारी कर निबंधन के लिए प्रस्तुत किया जाता है तो उनका क्रय, विक्रय/ निबंधन तत्काल प्रभाव से रोका जाता है। उक्त भूमि पर राज्य सरकार/ ग्राम सभा का व्यापक हित निहित है।
वर्जन
खतौनी में जमीन बिक्री पर रोक लगाने का आदेश पर अंकित करा दिया गया है। जिससे कोई भी अधिग्रहीत जमीनों की बिक्री न कर सके।
- प्रिया सिंह, तहसीलदार