परमट स्थित बाबा आनंदेश्वर मंदिर में आरती करते पुजारी।
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कानपुर। परमट मंदिर के पट अब ऐसे नहीं बंद होंगे। पुजारी करणगिरि के निधन पर बिना सूचना रविवार को परमट मंदिर बंद करने पर अपनी गलती महंत रमेशपुरी ने स्वीकार की है। उनका कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं थी। इस कारण ऐसा हुआ है। भविष्य में दोबारा अब किसी पुजारी के निधन पर मंदिर के पट नहीं बंद किए जाएंगे।
अमर उजाला ने 28 जून के अंक में ‘परमट मंदिर में लगा ग्रहण’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से छापा था। खबर को संज्ञान में लेते हुए जूना अखाड़ा के उपाध्यक्ष प्रेमगिरि ने महंत रमेशपुरी से परमट मंदिर बंद करने की जानकारी की। उन्होंने बताया कि जूना अखाड़ा में ऐसी कोई परंपरा नहीं है। पुजारी के निधन पर शोक व्यक्त करना चाहिए था लेकिन मंदिर बंद नहीं करना चाहिए। इससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचती है। परमट में अधिकतर भक्त ऐसे हैं जिनकी दिनचर्या बाबा के दर्शन के बाद शुरू होती है। इसलिए अब भविष्य में दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी। परमट मंदिर के महंत रमेशपुरी का कहना है कि जल्दबाजी में ऐसा निर्णय हुआ था। अब ऐसा दोबारा नहीं होगा। मुझे दुख है कि मंदिर के पट बंद होने से अधिकतर श्रद्धालु बाबा के दर्शन नहीं कर सके।