केंद्र सरकार के बीते पांच साल के बजट से कानपुर के उद्यमियों को निराशा हाथ लगी है। उद्यमी छोटे और मझोले उद्योगों के उत्थान के लिए हर बार घोषणाओं की बाट जोहते रहे, लेकिन ऐसी कोई महत्वपूर्ण घोषणा केंद्र सरकार की ओर से नहीं हुई।
कानपुर के आईआईए और पीआईए जैसे संगठनों की ओर से सौंपी गईं सिफारिशों को भी बजट में शामिल नहीं किया गया। बीमार एमएसएमई इकाइयों के पुनर्वास के लिए जारी आरबीआई के दिशा निर्देश जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो सके।
इसके सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों से 25 फीसदी अनिवार्य खरीद की व्यवस्था भी पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतरी। 2017-18 में 50 से 250 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों को 30 के बजाय 25 फीसदी कारपोरेट टैक्स के दायरे में लाने से भी शहर के उद्यमियों को बहुत राहत नहीं मिली।