भारतीय सेना को हम खुद मजबूत बनाएंगे। अब हमें रूस, अमेरिका, जर्मनी जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मेक इन इंडिया योजना हमारी मदद करेगी। दुनिया में हम सबसे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
यह कहना है डिफेंस मैटेरियल एंड स्टोर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (डीएमएसआरडीई) में जुटे रक्षा वैज्ञानिकों का। ये सभी संस्थान के 40वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। तीन दिन तक चलने वाले सेमिनार के दूसरे दिन शुक्रवार को देश के कई बड़े रक्षा वैज्ञानिकों ने शिरकत की।
ढाई हजार डिसे तापमान भी बेअसर
डीएमएसआरडीई के वैज्ञानिक डा. सुरेश कुमार ने एक ऐसा सिलिकॉन कार्बाइड मैटेरियल तैयार किया है जो ढाई हजार डिग्री सेल्सियस तापमान को भी सहन करने की क्षमता रखता है। इस मैटेरियल का प्रयोग मिसाइल के नोज और नोजल पर किया जाता है।
खास बात यह है कि इसे कोई भी शेप दिया जा सकता है। इस रिसर्च की फाइनल टेस्टिंग चल रही है। डा. सुरेश कुमार ने बताया कि टेस्टिंग होते ही इसे उपयोग में लाया जाने लगेगा। अभी तक विदेशी मैटेरियल का उपयोग किया जाता था।
अब हम दुनिया को सिखा सकते
मुख्य अतिथि नेवल विज्ञान एवं पदार्थ के डायरेक्टर जनरल डॉ. एससी सती ने कहा कि हम हर क्षण नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए संस्थान के डायरेक्टर डॉ. एन ईश्वर प्रसाद ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया को हम तकनीकी गुर सिखाएं।
डीएमएसआरडीई के अतिरिक्त निदेशक डॉ. एसडी खत्री, डॉ. डीके सतेवा, संयुक्त निदेशक टी. नंदी, पूर्व निदेशक डॉ. आरबी श्रीवास्तव, डॉ. वेंकट, डॉ. एम नसीम, डॉ. केयू भास्कर आदि ने कई मसलों पर विचार व्यक्त किए। डॉ. हिमांशु बख्शी, डॉ. अमित कुमार सोनी, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. स्वाती आदि मौजूद रहे।
न्यूक्लियर हमलों से बचाएगा शेल्डिंग पैड
सरहद पर तैनात जवानों की रक्षा अब देश में बने न्यूक्लियर शेल्डिंग पैड के जरिए होगी। यह पैड किसी भी न्यूक्लियर और बायोलॉजिकल हमलों से सेना के जवानों को बचाएगा।
डिफेंस मैटेरियल एंड स्टोर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (डीएमएसआरडीई) के रक्षा वैज्ञानिक डा. डीएन त्रिपाठी और डा. ओपी गौतम ने इस पैड को तैयार किया है। अभी तक इस पैड के लिए रूस और अमेरिका पर निर्भर रहना पड़ता था।
डा. ओपी गौतम ने बताया की जल्द ही देश के 2352 बीएमपी-2 और 2-के युद््ध टैंकरों को इस पैड के जरिए कवर किया जाएगा। आर्मी बेस वर्कशॉप ने इसकी जिम्मेदारी भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) को दी है। दोनों के बीच समझौता हो चुका है।
डा. गौतम के अनुसार विदेशी पैड खरीदने में देश का काफी पैसा खर्च होता था। अब इसे अपने देश में तैयार किया जाएगा और देश का काफी पैसा बचेगा।
डा. गौतम बताते हैं कि यह पैड विदेशी पैड से काफी सस्ता और बेहतर है। विदेशी पैड की अपेक्षा यह बीस प्रतिशत अधिक प्रभावशाली है।