नोटबंदी के चलते एक ठन-ठन गोपाल डाकघर में लगातार दो सप्ताह से ग्राहकों की रोजाना लाइन लग रही है। आखिर में सभी को निराश होकर घर वापस लौटना पड़ रहा है। लगातार 15 दिन से ग्राहक ऐसा करते-करते तंग हो चुके हैं। पोस्टमाटर लोगों को कल आने की कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
8 अक्टूबर को रिजर्व बैंक की 1000 व 500 के नोट की बंदी के बाद लोगों को भारी परेशानी का सामना धन जमा व निकालने में हो रही है। वहीं इस समय बैंकों में तो लाइन लगाकर कुछ रुपये ग्राहकों को मिल जाता है। तो वहीं लखना डाकघर में पिछले 15 दिनों से रुपये न आने के कारण सुबह से ही लाइनें लग जाती हैं। जब पोस्टमाटर आते हैं तो जब लाइन में लगे ग्राहकों से रुपये न आने की बात की जाती है।
यह ग्राहक मायूस होकर अपने घरों को वापस होने के लिए मजबूर होते हैं। वहीं डाकघर से पोस्टमाटर से सेवानिवृत गनपत दीक्षित बताते हैं कि उनको 12 दिन से चक्कर लगाते हो गये हैं। उनको आज तक पेंशन नहीं मिली रोज लाइन में लगकर लौटना पड़ रहा है।
वहीं दिनेश वर्मा,पूरनमल शर्मा ,ओमप्रकाश बर्मा,अखिलेश भदौरिया,रामप्रकाश पाल ,मुन्नाबाबू,इकबाल खां कहते हैं कि उन्हें रोज लाइन में लगना पड़ता है। बाद में पोस्टमाटर आते ही रुपये न होने की बात करते हैं तो वापस लौटना पड़ता है। यह ग्राहकों के साथ मजाक सा किया जा रहा है।
पोस्टमाटर चन्द्रपाल सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि जब उन्हें इटावा से 6 लाख की चैक दी गयी। वह स्टैट बैंक लेकर गये तो शाखा प्रबंधक ने साफ मना कर दिया कि मेरे पास खुद लाइन लगी भुगतान नहीं किया जा सकता है। जब रुपया आयेगा तभी लोगों को बांटा जा सकेगा।