विरोध के बाद रेलवे के ड्राइवर फॉग सेफ्टी डिवाइस अपने साथ लेकर चलने लगे हैं। हालांकि अभी कोहरा बहुत ज्यादा नहीं पड़ रहा है लेकिन ड्राइवरों की जिद खत्म होने से भविष्य में ट्रेनें कोहरे की वजह से लेट नहीं होगी।
इस डिवाइस की सबसे खास बात यह है कि आने वाले सिग्नल की दूरी को डिस्पले द्वारा और बोलकर बता देती है। इससे ड्राइवर अलर्ट हो जाता है।
डेमो पिक
सिग्नल करीब देखकर अलर्ट होते हैं ड्राइवर
फॉग सेफ्टी डिवाइस इंजन में मौजूद ड्राइवर को आने वाले सिग्नल की दूरी बताती है। इससे ड्राइवर सिग्नल आने से पहले अलर्ट हो जाता है। सिग्नल ग्रीन होता है तो ट्रेनें बिना रुके अपनी स्पीड में चलती हैं।
सिग्नल डबल पीला और पीला होने पर धीमी होती हैं और रेड होने पर रुक जाती हैं। बिना डिवाइस वाली ट्रेनों के ड्राइवर इतनी धीमी चलाते हैं कि उन्हें सिग्नल दिखते रहें। इस कारण ट्रेन लेट भी होती हैं।
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80 प्रतिशत ड्राइवर ले जाने लगे डिवाइस
कानपुर की इलेक्ट्रिक यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के 80 फीसदी ड्राइवरों ने डिवाइस ले जानी शुरू कर दी है। यहां यात्री ट्रेनों के लिए 100, मालगाड़ी के लिए 80 और डीजल इंजन वाली ट्रेनों के लिए 35 डिवाइस ड्राइवर लॉबी से दी जा रही है।
दरअसल, पिछले साल कानपुर और इलाहाबाद के ड्राइवरों ने डिवाइस और चार्जर का वजन आठ किलो होने की वजह से साथ ले जाने से मना किया था। उनका कहना था कि वह पहले से इतना सामान लेकर जाते हैं।
डिवाइस को इंजन में ही फिट करा दें। अब चार्जर (करीब दो किलो का) लेकर नहीं चलना होगा। स्टेशन से चार्ज डिवाइस दी जाएगी। भविष्य में इन डिवाइस को इंजन में फिट करने की योजना है।