पुलिस का नाम आते ही लोगों के दिमाग में बेरहम, बेमुरव्वत और संवेदनहीन पुलिस की तस्वीर दिखने लगती है। लेकिन अपने पुलिस मुखिया के बारे में जानेंगे तो पहली बार शायद आप भी यकीन न करें, लेकिन यह सच है। बेहद ईमानदार, सरल स्वभाव और सादगी भरा जीवन जीने वाले व्यक्ति हैं सुलखान सिंह। इसलिए उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी से रिश्वत नहीं ली। इस बात का सबूत छिपा है यहां...
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सुलखान सिंह के घर पर लगी नेम प्लेट
आप तलाश करेंगे तो ऐसे तमाम अफसर मिल जाएंगे जिनके नाम करोड़ों की सम्पत्ति होगी लेकिन सुलखान ऐसे आईपीएस अफसर हैं जिनकी वर्दी पर कभी रिश्वत लेने का दाग नहीं लगा।
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सुलखान सिंह की बच्चों के साथ पुरानी तस्वीर
उन्होंने अपन पूरे कॅरियर में कभी किसी से रिश्वत नहीं ली और न ही उनके खिलाफ कभी कोई ऐसा मामला प्रकाश में आया। इसी की परिणाण है कि आज यूपी को एक ईमानदार छवी का डीजीपी मिला है। इनकी ईमानदारी के चलते इन्हें 'वर्दी वाले योगी' भी कहते है।
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बांदा स्थित सुलखान सिंह का घर
सुलखान सिंह बांदा जिले के बाशिंदे हैं। उनका पैतृक गांव जौहरपुर है। इन दिनों सोशल मीडिया पर उनके घर की एक तस्वीर वायरल हो रही है।
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सुलखान सिंह का पैतृक घर
यह तस्वीर देखकर कोई भी चौंक पड़ेगा। किसी को अपनी आंखों पर यकीन नहीं होगा। हो सकता है कि इसे देखकर स्वत: ही मन में सवाल आ जाएे कि इतनी बड़ी हैसियत रखने वाले अफसर का घर ऐसा कैसे हो सकता है।
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सुलखान सिंह के परिजन
दरअसल, सब उनके पद को देखकर मन ही मन ये अनुमान तो जरूर लगा लेंगे कि उनका एक बंग्ला तो जरूर होगा। लेकिन ऐसा हरगिज नहीं है। उन्हें सरकारी अफसर होने के नाते सरकारी आवास तो जरूर मिले हैं लेकिन उनके नाम कोई बंग्ला या खास सम्पत्ति नहीं हैं।
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सुलखान सिंह के परिवार की तस्वीर
सुलखान सिंह की ये तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि ये सुलखान के परिवार की तस्वीर हैं। जो उनके पैतृक गांव में उनके घर पर मौजूद है।
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सुलखान सिंह के स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज उनका नाम
यह तस्वीर सुलखान सिंह के स्कूल रिकॉर्ड की है। इसमें उनका नाम दर्ज है। ये तस्वीर भी सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही है।
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सुलखान सिंह का बांदा स्थित पैतृक घर
जब सोशल मीडिया पर शेयर किया था रोजा रखने का अनुभव
अपनी ईमानदारी और कड़े निर्णय के लिए जाने जाने वाले सुलखान सिंह हर तरह के अनुभव लेते रहते हैं। साल 2015 की बात है रमजान का मौका था। उन्होंने अपने एक मुस्लिम मित्र को फोन कर रोजा रखने की इच्छा जाहिर की।
उनके मित्र ने रोजा रखने की पूरी प्रक्रिया बताई कि सहरी से लेकर इफ्तार के समय तक एक दाना या एक कतरा पानी भी नहीं खाया पिया जा सकता। उन्होंने अगले दिन रोजा रखा और फिर उसे फेसबुक के जरिए सोशल मीडिया पर अपना अनुभव शेयर किया।