35 हजार की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाती है
इसके बाद नवंबर और दिसंबर माह में शादी का मुहूर्त है। विभाग जुलाई के बाद इनके सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करेगा। ग्राम विकास अधिकारी आवेदक घर जाकर सत्यापन करेंगे। इसके साथ ही छह पड़ोसियों से भी तस्दीक करेंगे। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद जोड़ों को सामूहिक विवाह योजना का लाभ देने की रिपोर्ट लगाएंगे। योजना में एक शादी पर 51 हजार रुपये खर्च होते हैं। इनमें से 35 हजार की राशि दुल्हन के खाते में भेजी जाती है। 10 हजार रुपये के उपहार और छह हजार अन्य खर्च के मद में होता है।
निदेशालय की टीम लेगी फीड बैक
सामूहिक विवाह योजना में अब आवेदन करने वाले लड़का और लड़की के पास आधार लिंक मोबाइल नंबर होना जरूरी है। आवेदन के समय मोबाइल पर ओटीपी आएगा, जिसके बाद ही आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सात फेरे लेने वाले जोड़े सही है, इसकी पुष्टि के लिए समाज कल्याण विभाग ने लखनऊ में एक कमांड कार्यालय बनाया है, जहां से पूछताछ होगी कि शादी की गई है या नहीं। विभाग की तरफ से रुपये मिले या नहीं। उपहार में क्या-क्या मिला।
सामूहिक विवाह में पारदर्शिता लाने के लिए यह निर्णय लिया गया है। पड़ोसियों की रिपोर्ट अहम होगी। कई जिलों में शादीशुदा जोड़े शामिल होने की शिकायतें आईं थीं। अब निदेशालय से वर और कन्या से फीड बैक लिया जाएगा। -प्रशांत कुमार, समाज कल्याण निदेशक