सूत्रों ने बताया कि हादसे के बाद आयुध निर्माणी बोर्ड की ओर से गठित चार सदस्यीय हाई पावर कमेटी के अलावा डायरेक्टर जनरल क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) जबलपुर की टीम ने ब्रिगेडियर रवि भारद्वाज की अगुवाई में हादसे की जांच की थी। इसके अलावा निर्माणी से जुड़ी डीजीक्यूए की टीम अभी भी जांच कर रही है।
सूत्रों ने बताया कि हादसे के पांचवें दिन ही हादसा स्थल में पड़े खून, कैरिज, सिलेंडरों के फटने के अवशेषों आदि को हटा दिया गया था। पूरे स्थल की पानी से सफाई की गई थी। इससे अब भी कई सवाल खड़े हैं। यहीं नही हादसे में मृतक के परिजनों को भी अभी तक कोई राहत राशि या नौकरी आदि नहीं दी गई है। सूत्रों ने बताया कि जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
बताया कि हादसे के लिए जिम्मेदार अफसरों को बचाने के लिए ही अब तक कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई गई। इसके चलते मृतक के परिजनों को कोई बीमा आदि का लाभ भी नहीं मिल सकेगा। बताया गया कि मृतक के परिजनों को मृतक आश्रित के नाम पर नौकरी दिलाने की बातें कहकर जांच अफसरों के सामने कुछ भी न बोलने का दबाव भी बनाए हुए हैं।