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इस शुभ मुहूर्त में बरसेगी मां दुर्गा की असीम कृपा

Wed, 29 Mar 2017 12:13 AM IST
राहुल शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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नवसवंत्सर वर्ष श्रीसंवत 2074 शुरू होगा
इस बार नवरात्र 29 मार्च से प्रारंभ होंगे। इसी दिन नवसवंत्सर वर्ष श्रीसंवत 2074 भी शुरू होगा। इस साल का नाम साधारण है। बुध उसका राजा और गुरु मंत्री होगा। रामनवमी 5 अप्रैल को है। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:34 बजे का है। इस बार प्रतिपदा का ह्मस है। 29 मार्च को प्रतिपदा/द्वितीया होगी। खरमास चलने के कारण नवरात्र में मांगलिक कार्यक्रम वर्जित होंगे।
चैत्र नवरात्र का महत्व
ब्रह्माजी ने एक दिन सृष्टि की रचना की है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में हुई थी। इसलिए सृष्टि का प्रारंभ चैत्र नवरात्र से माना जाता है। 
 
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नवरात्र विशेष
विभिन्न पांचांगों के अनुसार नवरात्र
-निर्णय सागर पांचांग (नीमच झारखंड) के अनुसार 28 मार्च को सुबह 8:26 के उपरांत प्रतिपदा तिथि शुरू होगी। इस कारण नवरात्र 28 मार्च से है। जबकि रामनवमी 4 और 5 अप्रैल को है। कारण है कि 5 अप्रैल को उदयातिथि है।
-काशी विश्वनाथ पांचांग के अनुसार 29 मार्च सूर्योदय के साथ प्रतिपदा शुरू होगी। कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त सूर्योदय के बाद का होगा। रामनवमी 5 अप्रैल को है।
-ठाकुर प्रसाद श्रीहनुमान पांचांग के अनुसार 29 मार्च से प्रारंभ होंगे। रामनवमी 5 अप्रैल को है।
-गणेश आपा पांचांग के अनुसार 29 मार्च को शुरू होंगे। कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:34 बजे का है। रामनवमी 5 अप्रैल को है।
-चिंतामणि पांचांग बनारस के अनुसार 28 मार्च को अमावस्या सुबह 8:27 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि अगले दिन 29 मार्च को मिलेगी। इस कारण नवरात्र 29 मार्च को ही शुरू होंगे। कलश स्थापना सूर्योदय के बाद शुरू होगा। रामनवमी 5 अप्रैल को है।
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नवरात्र विशेष
दो शुभ मुहूर्त होंगे
ज्योतिषचार्य और वस्तु शास्त्री रमेश शुक्ला चिंतक ने बताया कि सूर्य के 13 अप्रैल तक धनु राशि में होने केकारण खरमास चल रहा है। सूर्य के राशि परिवर्तन होने के बाद ही मांगलिक कार्यक्रम शुरू होंगे। उन्होंने बताया कि कानपुर शहर में पूजा-पाठ और पर्व काशी यानी बनारस पांचांग के अनुसार ही मनाए जाते है। महामोहपाध्याय आदित्य पांडेय का कहना है कि 28 मार्च को सुबह 8:28 बजे तक अमावस्या तिथि है। इसी के बाद प्रतिपदा का प्रारंभ होना चाहिए। 29 मार्च को प्रतिपदा का क्षय होते हुए द्वितीया प्रारंभ हो जाएगी जो दिनभर रहेगी। इसी दिन मध्य रात्रि 2:49 बजे को पूरी होगी। उदयातिथि केनियम के अनुसार धर्म सिंधु कहता है कि सूर्योदय के समय जो तिथि प्रारंभ हो उसे पूरे दिन माना जाता है। ऐसे में 29 मार्च को द्वितीया मान्य होगी तथा कलश स्थापना का मुहूर्त सूर्योदय से 6:34 बजे तक है। दूसरा मुहूर्त सुबह 7:38 से 9:10 बजे तक कलश स्थापना के लिए धर्म संवत है।
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