घंटाघर के सुंदरीकरण के साथ ही इसे नो टेंपो जोन घोषित किया जाएगा। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव बुधवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए। इनमें शहर से रोजाना निकलने वाले कूड़े के निस्तारण के लिए कोई भी कंपनी आए, लेकिन नगर निगम के कर्मचारी ही मोहल्लों से कूड़ा एकत्र करेंगे और उसे निस्तारण प्लांट तक पहुंचाएंगे।
इसके लिए नगर निगम अपने संसाधन बढ़ाएगा। बंद पड़े 28 वार्ड कार्यालय पुन: खुलेंगे। मार्ग प्रकाश विभाग हर वार्ड में संविदा पर एक - एक कर्मचारी रखेगा। हैंडपंप नहीं लगाने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई भी होगी। नगर निगम के कार्यों की निगरानी के लिए छह सदस्यीय निगरानी कमेटी बनेगी।
ये सभी फैसले बुधवार को नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिए गए। नगर निगम समिति कक्ष में करीब पौने चार घंटे चली कार्यकारिणी समिति की बैठक में घंटाघर के सुंदरीकरण पर चर्चा हुई। पार्षद आशुतोष त्रिपाठी के इस प्रस्ताव पर घंटाघर को नो टेंपो जोन बनाने और सुंदरीकरण को सर्वसम्मति से स्वीकृत दे दी गई।
शहर में कूड़े की समस्या पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम एक जोन का कूड़ा उठाने के लिए एटूजेड को औसतन 60 लाख रुपये देता था और 2.90 करोड़ रुपये की नई गाड़ियां भी खरीदकर दी थीं। इनमें से ज्यादातर गाड़ियां खराब हैं।
जबकि अब नगर निगम ने जिन चार जोनों में कूड़ा उठाना शुरू किया है, उनमें इसी कार्य में औसतन 30-35 लाख रुपये खर्च आ रहा है।
बैठक के बाद महापौर जगतवीर सिंह द्रोण, नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह और अपर नगर आयुक्त (प्रथम) विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि कूड़े के मामले में कार्यकारिणी ने फैसला लिया कि कूड़ा निस्तारण के लिए कोई भी कंपनी आगे आए, लेकिन नगर निगम ही अपने संसाधनों से गली, मोहल्लों से कूड़ा एकत्रित कराएगा।
एक दो महीने में नगर निगम सभी छह जोनों में कूड़ा उठाने की तैयारी कर रहा है, जबकि अभी निगम चार जोनों में कूड़ा उठा रहा है। हर वार्ड में संसाधन दोगुने किए जाएंगे।