फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जंगल में चल रहा ‘रहस्यमय कैंप’, आती हैं ‘यस सर, नो सर’ की आवाजें

Wed, 19 Jul 2017 12:15 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 4
डेमो पिक
लश्कर-ए-तैयबा आतंकी सलीम खान के जिले में कोई ‘रहस्यमय ट्रेनिंग कैंप’ चला रहा है। ऐसा यहां के गांववालों का कहना है कि शहर की आबादी से बाहर तीन साल से संचालित संदिग्ध प्रशिक्षण कैंपों का रहस्य छंट नहीं रहा है। यहां गैर प्रांत के युवाओं को  प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण किस तरह का है, इस बारे में कोई नहीं जानता है। प्रशासन के पास भी कोई ठोस जवाब नहीं है। इन कैंपों में दूर से सिर्फ यस सर, नो सर की आवाजेें गूंजती हैं। सैकड़ों की तादाद में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं को पुलिस प्रशासन व खुफिया इकाई दोनों पूरी तरह नजर अंदाज कर रही हैं। 
 
विज्ञापन

2 of 4
डेमो पिक
फतेहपुर शहर में तीन साल से आबादी के बाहर स्थान बदल-बदलकर युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें श्रीनगर, बंगाल, असम, गुजरात, बिहार  से लेकर महाराष्ट्र तक के युवा शामिल हैं।वर्तमान समय में नेशनल हाईवे पर रिलायंस पेट्रोल पंप के पीछे और आबूनगर में किला के पास प्रतिदिन सुबह पांच बजे से सात बजे के बीच यह कैंप चल रहे हैं। इन कैंपों में एक भी स्थानीय युवा शामिल नहीं है।
विज्ञापन

3 of 4
डेमो पिक
कैंप के पास पहुंचने पर प्रशिक्षक और प्रशिक्षणार्थी दोनों चुप्पी साध लेते हैं। दूर से यस सर, नो सर की आवाजों के अलावा कुछ भी सुनाई नहीं देता है।  प्रशिक्षण लेने वाले किराये पर कमरे लेकर आसपास ही रहते हैं। यह पूछने पर व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने की बात बताते हैं। व्यवसाय के बारे में जानकारी नहीं देते हैं। दूसरी ओर एसपी कवींद्र प्रताप सिंह का कहना है कि अभी उन्हें ऐसी जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कोई कैंप चलता है, तो जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन

4 of 4
डेमो पिक
शिक्षण संस्था की कार्यशैली संदिग्ध  फतेहपुर हंसवा पुलिस चौकी के पास जंगल में संचालित एक शिक्षण संस्था की कार्यशैली भी संदिग्ध बताई जा रही है।  प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि यहां पर देर रात गैर प्रांतों की लग्जरी कारें खड़ी रहती हैं।  यह भोर से पहले गायब हो जाती हैं। यह शिक्षण संस्था क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें