अयोध्या में मंदिर-मस्जिद मुकदमे में मालिकाना हक पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर मुस्लिम समाज में काफी चर्चाएं हुईं। सभी ने फैसले को अपने-अपने नजरिये से देखा और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का जिक्र किया। इसके बाद अब शहरवासियों ने तलाक महल की बिलाल मस्जिद की चर्चाएं तेज कर दी हैं।
यह एक ऐसी मस्जिद है, जिसका मालिकाना हक भी मुस्लिमों के पास है लेकिन इस पर ताला भी मुसलमानों ने डाल दिया है। 10 साल पहले 2009 में रमजान के जुमा अलविदा को इसमें नमाज शुरू होनी थी, लेकिन मस्जिद पर नियंत्रण और इमाम बरेलवी या देवबंदी विचारधारा को लेकर बात फंस गई। मामला जिला प्रशासन तक पहुंच गया। तब से आज तक इस मस्जिद का ताला न खुलने के पीछे मूल जड़ बरेलवी-देवबंदी विवाद है।