संतुलित, सात्विक और संस्कारिक आहार
नाद साधना के साथ ही उन्हें संतुलित, सात्विक और संस्कारिक आहार के बारे में बताया गया। यौगिक क्रियाएं कराई गईं। प्रोजेक्ट में शामिल मुस्लिम महिलाओं ने भी इसका पालन किया। डॉ. सारस्वत ने बताया कि ओंकार सृष्टि नाद है। लाभ मिलता तो यह आस्था का हिस्सा हो जाता है। यह निजी मामला होता है।
गर्भसंस्कार के प्रोजेक्ट में 15 फीसदी मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। ये महिलाएं मां की पाठशाला ऑनलाइन कार्यक्रम में भी शिरकत करती हैं। नाद साधना, योग वगैरह भी करती हैं। यह सृष्टि का नाद है, सबको इसका लाभ लेना चाहिए। मां स्वस्थ रहेगी, तो बच्चे भी स्वस्थ और संस्कारवान होते हैं। इसमें धर्म, वर्ग और जाति कहीं आड़े नहीं आती। -डॉ. संगीता सारस्वत
सृष्टि नाद से लाभ (डॉ. संगीता सारस्वत)
- ओम के उच्चारण से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ती, कार्बन डाई ऑक्साइड कम होती है।
- लैक्टिक एसिड कम बनता है, इससे थकान, कमजोरी नहीं लगती है।
- न्यूरोनल कनेक्शन अच्छे बनते है।
- डोपामीन, एंडोरफिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटोसिन और एनकेफ्लीन हार्मोंस का सामंजस्य बना रहता है।
- गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, मस्तिष्क का विकास तेज होता है।