अपने मकान की छत पर खाट लगाए सो रहे थे। देर रात धमाका हुआ तो मैं खाट से नीचे गिरा। हमें लगा कि मेरा पूरा परिवार खत्म हो गया। खुद को संभालते हुए नीचे की ओर आए। वहां पत्नी को बच्चों को रोता बिलखता देख खुद को नहीं रोक पाए। पूरा मकान जर्जर हो चुका था। -वंशराज, मकान मालिक
जिस कमरे में धमाका हुआ था। एक दिन पहले पति उसकी छत पर सो रहे थे, लेकिन घटना वाली रात जीने के पास सोए थे। भगवान ने मेरा सुहाग बचा लिया। इधर बच्चे बहू भी धमाके से सहम गए। -श्यामा देवी, मकान मालिक की पत्नी
देर रात खाना खाकर सो रहा था। धमाके की आवाज सुनकर पहले तो डर गया। इसके बाद हिम्मत बांधकर बाहर आया। बाहर का नजारा देख शोर मचाया तो लोग घरों से बाहर आए। इसके बाद बचाव कार्य शुरू किया गया। -दीपू, पड़ोसी
दीवार के नीचे दब गया था विष्णु
वंशराज के बेटे विनय ने बताया कि पत्नी प्रीति और मां नीचे कमरे में सो रहे थे। पिता वंशराज छत पर थे। छोटा भाई अजय कुमार बाहर आंगन में सो रहा था। विनय ने बताया कि जब धमाका हुआ, तो वह परिवार के साथ बाहर आ गया। ऊपर से चीखने की आवाज आ रही थी। पता चला कि विष्णु दीवार के नीचे दब गया है।
अरे मुझे बचाओ बिल्डिंग ढहने वाली है
विनय ने बताया कि जब सब बाहर आ गए थे उसी के थोड़ी देर बाद पिता वंशराज छत से चिल्लाने लगे, मुझे बचाओ बिल्डिंग ढहने वाली है। उसके बाद फिर से बेटा अपने साथी के साथ ऊपर पहुंचा और पिता को बगल वाली इमारत से उतारकर लाया।
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- फोटो : अमर उजाला
घनी बस्ती बनी बचाव में रोड़ा
धमाके की सूचना के बाद पुलिस और फायरबिग्रेड के जवान पहलवानपुरवा पहुंचे लेकिन घनी बस्ती के बीच बनी गलियों में किसी का वाहन नहीं जा सका। नतीजा यह हुआ कि आस पड़ोस के लोगों ने अपने घरों से ही पानी की बौछार कर आग पर काबू पाया। वहीं, आग से झुलसे लोगों को एक-एक कर अस्पताल पहुंचाया गया।