योजना के तहत रात को नजीर के घर पर उस समय आग लगा दी गई, जब पूरा परिवार एक रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में शामिल होने गया था। शादी का उपहार घर पर ही भूल जाने के कारण नजीर का बेटा शमसुल हसन अपने भाई मोहम्मद हसन के साथ घर आया, तो उसने घर पर आग लगी देखी। वहां पर इरफान व रिजवान को भी साथियों के साथ मौजूद पाया था।
शमसुल को आग में धकेलने की की गई थी कोशिश
आरोप है कि इन लोगों ने शमसुल को मारापीटा और आग में धकेलने की कोशिश भी की थी। इसी बीच पुलिस के आ जाने पर भीड़ भाड़ का फायदा उठाकर सभी भाग निकले थे। विधायक के डर के कारण उस दिन तो नजीर ने रिपोर्ट नहीं लिखाई, लेकिन अगले दिन जाजमऊ थाने में इरफान व रिजवान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद विवेचना के दौरान कई और आरोपियों का पता चला, जिन्हें जेल भेजा गया।
12 के खिलाफ चार्जशीट, पांच की सुनवाई पूरी
अब तक 12 के खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल हो चुकी है। पांच आरोपियों की कोर्ट में सुनवाई भी पूरी हो गई है। इनके खिलाफ अभियोजन ने पर्याप्त सबूत कोर्ट में पेश किए हैं। कोर्ट में पेश अभियोजन के 18 गवाहों में से मुख्य रूप से पीड़िता नजीर फातिमा, उनकी बेटी कनीज जेहरा, बेटे शमसुल हसन व मोहम्मद हसन ने जहां कोर्ट को आपबीती बताई है। वहीं, अकील अहमद, नसीम आरिफ व शारिक अली बरकाती ने षड़यंत्र रचे जाने की पुष्टि की है। एक मुख्य गवाह विष्णु कुमार सैनी ने अभियुक्तों द्वारा आग में ज्वलनशील पदार्थ की बोतलें फेंकते हुए देखने की बात भी कोर्ट को बताई है। फोरेंसिक टीम के गवाह डॉक्टर प्रवीण श्रीवास्तव ने भी आग लगाने में ज्वलनशील पदार्थ के इस्तेमाल की पुष्टि की है।
नजीर न तो प्लॉट मालिक, न किरायेदार और न ही कब्जेदार
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता सईद नकवी, करीम अहमद सिद्दीकी व शिवाकांत दीक्षित का तर्क है कि प्लाट को रिजवान ने खरीदा था। उसके नाम पर रजिस्ट्री है तो वह अपने ही प्लॉट पर आग क्यों लगाएगा। अभियोजन कोई भी ऐसा गवाह पेश नहीं कर सका ह, जिसने आग लगाते देखा हो। सभी ने आग लगी हुई देखने की बात कही है। नजीर कोर्ट में यह भी साबित नहीं कर सकी है कि वह प्लॉट पर किस हैसियत से रहती थी, क्योंकि वह न तो मालिक है, न किरायेदार और न ही कब्जेदार। बचाव पक्ष ने सबूतों के माध्यम से यह जरूर साबित कर दिया है कि नजीर का दूसरी जगह एक पक्का मकान है और उसी पते से उसके व उसके बच्चों के मतदाता पहचान पत्र व पासपोर्ट आदि भी बने हैं।
घटना के कई घंटे पहले और बाद तक इरफान-रिजवान थे घटनास्थल से दूर
इरफान और रिजवान के मोबाइल फोन की काल डिटेल व लोकेशन रिपोर्ट भी साफ करती है कि घटना के कई घंटे पहले और कई घंटे बाद तक दोनो घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर थे। रिजवान तो शहर में ही नहीं था, लखनऊ में था। अभियुक्त शौकत अली के अधिवक्ता रवीन्द्र वर्मा का कहना है कि शौकत का घटना से कोई लेना देना नहीं है। घटना के एक माह बाद दूसरों के बताने के आधार पर शौकत का नाम जोड़ा गया। पीड़ित पक्ष ने शौकत का नाम नहीं लिया है और जिसके बताने पर शौकत का नाम जोड़ा गया उसे कोर्ट में गवाह के रूप में पेश नहीं किया गया।
शरीफ को जबरन घर से उठा लाई थी पुलिस
अभियुक्त मोहम्मद शरीफ के अधिवक्ता चंद्रभान शर्मा का कहना है कि शरीफ को पुलिस जबरन घर से उठा लाई थी और घटना से जोड़कर जेल भेज दिया था। शरीफ की बीवी ने उसी दिन उच्चाधिकारियों को शिकायत भी की थी जिसके सबूत भी कोर्ट में पेश किए गए हैं। इसराइल आटे वाला के अधिवक्ता जमील अंसारी ने भी उसे झूठा फंसाए जाने की बात कही है। सभी पक्ष सबूतों और गवाहों के साथ अपनी बात मजबूती से कोर्ट के सामने पेश कर चुके हैं अब बस फैसले का इंतजार है।