फतेहपुर में निरीक्षण में क्षमता से अधिक मिले 13 मौरंग डंपों में 11 को जांच में क्लीन चिट मिल गई। वहीं इन डंपों को मानक के अनुरूप ना होने की रिपोर्ट देने वाले कुल 18 अधिकारी और कर्मचारी फंसे हैं। छह पर कार्रवाई की गाज गिरी है। जिले में मौरंग डंप के लिए मई माह में 34 लाइसेंस जारी हुए थे। जून महीने में डंप चालू किए जाने से पहले मानक के अनुरूप डंप की जांच के आदेश हुए थे।
जिसके बाद 1 और 3 जुलाई को पहली बार तहसीलदार की टीम के कानूनगो और लेखपालों ने 13 मौरंग डंप को अवैध करार दिया था। नाप में 5 लाख19 हजार 500 घन मीटर मोरंग होने की रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी गई थी। इसी के आधार पर मानक से कई गुना डंप में मौरंग डंप होने का आरोप लगाया था, तभी इन डंप को प्रशासन ने 13 करोड़ की नोटिस भेजकर डंप उठाने पर रोक लगा दी थी।
कुछ डंप मालिकों ने दोबारा नाप कराए जाने की मांग की। दोबारा 19 और 25 जुलाई को जांच की गई। जिसमें 11 मौरंग भंडारण सही पाए गए। मामला विवादित हो जाने के कारण खनन निदेशालय की टीम ने तीसरी जांच 27 और 28 जुलाई की गई। दूसरी और तीसरी जांच एक समान पाई गई। दूसरी और तीसरी जांच में 3 लाख 56 हजार 403 घन मीटर मोरंग पाई गई। जिसके बाद डीएम अपूर्वा दुबे ने कर्मियों पर कार्रवाई की गाज गिराई है।
तत्कालीन खान निरीक्षक, तहसीलदारों समेत 18 फंसे
सदर व खागा के तहसीलदारों के खिलाफ भी विभागीय जांच संतुति की गई है, जबकि तत्कालीन खनिज निरीक्षक अजीत पांडेय व नायब तहसीलदार बिंदकी सिद्धान्त कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया है। सदर तहसील क्षेत्र से निलंबित छह राजस्वकर्मी में दतौली की लेखपाल सोनी देवी, ललौली के लेखपाल गिरजाशंकर, जमेनी के लेखपाल कंधई पाल, महना के लेखपाल राहुल सिंह व महना के कानूनगो राजेन्द्र प्रसाद सिंह, ललौली दतौली जमेनी के कानूनगो राजबहादुर मौर्य पर कार्रवाई की गाज गिरी है।