नियामक आयोग के निर्देश भी हैं ये
इस पर उपभोक्ता की जिम्मेदारी होगी, लेकिन मीटर में तकनीकी खराबी हुई है, तो पांच साल के भीतर संबंधित डिस्कॉम यानी केस्को मीटर बदलने का खर्च और मीटर की कीमत उपभोक्ता से नहीं ले सकता है। उसे निशुल्क मीटर बदलना होगा। ये नियामक आयोग के निर्देश भी हैं।
उद्यमियों ने भी इसे बताया केस्को की मनमानी....
केस्को मनमर्जी कर रहा है। यह ग्राहकों के साथ धोखा और छलावा है। सरकार अच्छी नीतियां ला रही है। उसके उलट केस्को के अफसर मनमानी कर रहे हैं। इस व्यवस्था में रोक लगनी चाहिए। -सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए
गारंटी मामले में केस्को ग्राहकों को सही जानकारी नहीं देता है। जब मीटर लगवाया जाता है तो केस्को गारंटी कार्ड तक नहीं देता है। गारंटी पीरियड में मीटर बदलवाने पर शुल्क देना होता है। टेस्टिंग सेक्शन में तमाम मीटर पड़े रहते हैं। -उमंग अग्रवाल, महासचिव फीटा
कुछ समय पहले पांच किलो वाट से ज्यादा भार वाला व्यावसायिक मीटर बदलवाना पड़ा था। गारंटी पीरियड में होने के बाद भी शुल्क देना पड़ा था। केस्को के कर्मचारी मनमानी करते हैं। -पंकज अरोड़ा, राष्ट्रीय सचिव कैट
केस्को में गड़बड़ी का बोलबाला है। बताया कुछ जाता है और होता कुछ और है। जब मीटर कंपनी केस्को को पांच साल की गारंटी देती है तो ग्राहकों को एक साल की गारंटी क्यों दी जा रही है। इसकी जांच होनी चाहिए। -अभिमन्यु गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, उप्र प्रांतीय व्यापार मंडल