यूपी में हुईं कुछ शादियों ने पूरे देश को अपनी ओर आकर्षित किया। ये शादियां किसी बड़े घरानों से संबंधित नहीं थीं, फिर भी इन्होंने पूरे देश में शोहरत बटोरी। साथ ही यहां एक ऐसी अर्थी भी उठी जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। आगे की स्लाइड्स में देखिए फेमस हुई शादियों और देश को हिलाकर रख देने वाली एक एसपी की आत्महत्या से जुड़ी तस्वीरें...
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27 जून 2018- शादी एक ऐसा पवित्र बंधन है जिसे यादगार बनाने के लिए वर और वधू दोनों पक्ष हर संभंव प्रयास करतें हैं।
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हर दूल्हा शादी में अपने लिए लग्जरी से लग्जरी कार का इंतजाम करता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी बारात से रूबरू कराते हैं जिसे देखकर न केवल आप अचंभित हो सकते हैं बल्कि इससे आपको एक सीख भी मिलेगी।
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यूपी के बुंदेलखंड में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की चौतरफा होड़ के बीच दुर्गम क्षेत्र में आबाद एक गांव में प्रकृति और पर्यावरण का शानदार सम्मान किया गया।
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कोशिश छोटी, पर महत्वपूर्ण थी। नरैनी क्षेत्र के मोहनपुर खलारी गांव में किसान संतोष कुमार पटेल ने अपनी बेटी प्रीति की शादी के सारे आयोजन और रस्में प्रकृति को समर्पित होकर किए थे।
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पुरानी परंपरा को ताजा करते हुए रंग-बिरंगी पोशाक (झूल) पहने बैलों वाली सजी-धजी दर्जनभर बैलगाड़ियों में बारात आई थी। कहारों के कांधों पर डोली में दूल्हा सवार हुआ।
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हरे पत्तों के मंडप में फेरे लिए। छ्यूल के पत्तों पर बारातियों को भोजन परोसा गया। दूल्हा-दुल्हन ने एक साथ पौधरोपण किया। विदाई में हरेक बाराती को एक पौधा रोपने के संकल्प के साथ उपहार में दिया गया।
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खलारी और आसपास के इलाकों में अजब रीति से हुई प्रीति की अनोखी शादी देखने के लिए पड़ोसी गांवों के लोग इकट्ठा रहे।
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बांदा मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश की सरहद के बीच आबाद खलारी गांव में सोमवार (25 जून)की रात खास थी।
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किसान संतोष कुमार पटेल की बेटी की बारात पड़ोसी मध्य प्रदेश के सरबई (छतरपुर) गांव से आई थी। खजूर की मौर और जामा पहने दूल्हा सुरेंद्र बैलगाड़ी पर सवार था। सुरेंद्र स्नातक हैं। यह कारोबार करते हैं।
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दुल्हन प्रीति इंटर की छात्रा है। बाराती बैलगाड़ियों का काफिला गांव से सात किलोमीटर दूर शंकर बाजार मोड़ से शाम 5 बजे शुरू हुआ। रात करीब 8 बजे बारात खलारी गांव पहुंची। लगभग दो सैकड़ा बाराती थे।
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16 दिसंबर 2018- बृहस्पतिवार को प्रिया की बारात आई और घोड़ी पर बैठे दूल्हे रविंद्र को उतारने के लिए एक दो नहीं, बल्कि प्रिया के पंद्रह भाइयों के हाथ आगे बढ़े। शुक्रवार को विदाई के वक्त भी प्रिया और उसका पूरा परिवार इन युवाओं को बार-बार दुआएं दे रहा था। युवाओं ने शादी में तमाम उपहार देकर बहन को विदा किया।
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टीम प्रमुख ओमकार और रघुराज ने नवदंपति को एक सदाबहार का पौधा उपहार देकर आशीर्वाद दिया और कहा कि जिस तरह से यह पौधा फलेगा, उसी तरह उनके जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने बताया कि यह पौधा पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी है। ओमकार के मुताबिक, लोग लाखों का सामान तो उपहार में देते हैं, साथ ही उन्हें नए जोड़े को को एक पौधा भी देना चाहिए।
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टीम प्रमुख ओमकार और रघुराज ने नवदंपति को एक सदाबहार का पौधा उपहार देकर आशीर्वाद दिया और कहा कि जिस तरह से यह पौधा फलेगा, उसी तरह उनके जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने बताया कि यह पौधा पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी है। ओमकार के मुताबिक, लोग लाखों का सामान तो उपहार में देते हैं, साथ ही उन्हें नए जोड़े को को एक पौधा भी देना चाहिए।
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4 सितंबर 2018 कानपुर कैंट एसपी आवासः एसपी पूर्वी सुरेंद्र कुमार दास ने 4 सितंबर को कैंट स्थित सरकारी आवास में जहर खा लिया था। पत्नी डॉ. रवीना और स्टफ ने उन्हें रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया था। 9 सितंबर को अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।
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कानपुर के एसपी सुरेंद्र कुमार की मौत के बाद उनकी पत्नी का नाम चर्चा में आ रहा है। एसपी सुरेंद्र के बड़े भाई नरेंद्र कुमार दास ने चुप्पी तोड़ी। नरेंद्र ने सुरेंद्र की पत्नी डॉ. रवीना सिंह पर गुस्सा निकाला। कहा, मेरे भाई की मौत के लिए उसकी पत्नी डॉ. रवीना जिम्मेदार है।
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रवीना, सुरेंद्र को परिवार से अलग करना चाहती थी। सुरेंद्र बहुत भावुक, संवेदनशील और परिवार को साथ लेकर चलने वाला था।
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बहू ने सुरेंद्र को इतना प्रताड़ित किया कि उसे जान देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं सूझा।
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नरेंद्र ने सुरेंद्र के अंतिम संस्कार के बाद पुलिस को तहरीर देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट की राइटिंग सुरेंद्र की लग रही है, लेकिन राइटिंग एक्सपर्ट से भी पत्र लिखवाया जा सकता है। इसलिए सुसाइड नोट की जांच कराना जरूरी है।
आईपीएस सुरेंद्र कुमार दास के सुसाइड मामले में उनके घर और ससुराल वालों को क्लीन चिट मिल गई है। मामले की जांच कर एसपी पश्चिम संजीव सुमन ने रविवार को अपनी रिपोर्ट आला अफसरों को सौंप दी। तीन महीने तक चली जांच में एसपी ने पाया कि सुरेंद्र कुमार दास शादी के बाद परिवार और ससुराल वालों के बीच सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे थे। इसी के चलते वह डिप्रेशन में रहते थे। खुदकुशी के पीछे यही वजह रही।