कानपुर देहात। जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में सांसद व पूर्व सांसद के बीच हुए विवाद के बाद बुधवार को सोशल मीडिया पर लोग तरह तरह की चर्चाएं करते रहें। वहीं पूर्व सांसद का कहना है कि वह पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मंत्रालय को भेजेंगे।
पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी ने बताया कि मंत्रालय को गुमराह कर दिशा के सदस्य बनाए गए हैं। दिशा के उद्देश्य क्या हैं? जिले में क्या चल रहा है। किस तरह सदस्य बनाए गए हैं। इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर केंद्र सरकार को भेजेंगे। उन्होंने कहा कि नियमों के विपरीत दिशा में काम किया जा रहा है। दिशा की आड़ में सांसद के लोग वसूली कर रहे हैं। मैने तो मंगलवार को दिशा की बैठक में अपनी बात अधिकारियों व समिति के अध्यक्ष (सांसद) के सामने रखी थी। सच कहना गलत नहीं हैं। कोई विधायक, जनप्रतिनिधि बात नहीं रख पाता। कोई मंत्री भी बैठक में नहीं जाता। दिशा की बैठक में पूरी मनमानी की जाती थी।
वारसी का कहना है कि मंगलवार की बैठक के बाद जब मैंने बात रखी तो अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली है। अधिकारी भी मानते हैं कि किसी ने तो बात रखी। कहा कि जिले स्तर के साथ राज्य स्तर पर भी जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) है। इसमें 22 राज्य शामिल हैं। उसका चेयरमैन मुख्यमंत्री होता है। मुख्यमंत्री को भी अवगत कराएंगे। जब भी बैठक बुलाई जाएगी तो मैं जाऊंगा, समिति के अध्यक्ष तय कर दें कि किसी का प्रतिनिधि नहीं जाएगा तो नहीं जाऊंगा। लड़ेंगे तो फिर लड़ेंगे, सही बात कहेंगे। प्रशासन के पास वीडियो व रिकार्डिंग होगी, देख लें, मैने पूरी मीटिंग में कुछ गलत नहीं कहा। उन्होंने ही स्वयं मुझे गालियां दी हैं। मीडिया के सामने मुझे वह सम्मान देते हैं, तो मैं भी उन्हें सम्मान देता हूं।
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जुर्माना पर लग चुकी रोक, फेंके गए क्रोमियम से नहीं सरोकार
रनियां (कानपुर देहात)। औद्योगिक क्षेत्र रनियां स्थित वारिस केमिकल फैक्टरी पर एनजीटी के लगाए जुर्माना को लेकर पूर्व सांसद ने अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। फैक्टरी से निकला केमिकल कचरा सीसीटैंक में डंप हैं। एनजीटी की टीम निरीक्षण कर चुकी है। खानचंद्रपुर में फेंके गए क्रोमियम से उनका सरोकार नहीं है।
पूर्व सांसद ने बताया कि जब उनकी फैक्टरी संचालित हुई इससे पहले क्षेत्र में क्रोमियम डंप था। उनकी फैक्टरी से निकला केमिकल कचरा फैक्टरी परिसर में ही बने सीसी टैंक में एकत्र है। इसके बावजूद भी एनजीटी ने जुर्माना लगाया था। हाईकोर्ट ने वसूली पर रोक लगा दी है। एनजीटी की टीम ने फैक्टरी के निरीक्षण में सीसी टैंक में केमिकल कचरा डंप पाया। इसका निस्तारण जल्द होने की उम्मीद है।
बता दें कि औद्योगिक क्षेत्र के खानचंद्रपुर में छह फैक्टरियों का सड़क किनारे खुले में 95 हजार मीट्रिक टन कोमियम कचरा डंप होने पर एनजीटी ने सभी छह फैक्टरियों पर 280 करोड़ का जुर्माना लगाया था। वर्ष 2020 में जुर्माना राशि अदा नहीं करने पर आरसी जारी कर दी गई थी। फैक्टरी संचालकों ने पक्ष न सुने जाने का तर्क देकर एनजीटी से गुहार लगाई थी। इसपर उन्हें मौका दिया गया था।