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रजा-कोरोना रोगियों को निगेटिव करने में एजीथ्रोमाइसिन दिखा रही असर

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कानपुर। कोरोना रोगियों का संक्रमण निगेटिव करने में एजीथ्रोमाइसिन दवा बहुत असरदार साबित हो रही है। अभी तक निगेटिव हुए रोगियों में एजीथ्रोमाइसिन के साथ प्रतिदिन दो टेबलेट पैरासीटामॉल और मल्टी विटामिन दी गईं थीं। इसके साथ ही उनको खाना पौष्टिक दिया गया और उनका मूड फ्रेश रखा गया। इससे रोगी 14 दिन के अंदर कोरोना से मुक्ति पाकर घर चले गए।
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एनआरआई सिटी से मिले पहले रोगी की दवा डोज में एजीथ्रोमाइसिन शामिल की गई थी। शहर का पहला रोगी 14 दिन के अंदर कोरोना निगेटिव हो गया। इसके बाद यह प्रयोग सरसौल सीएचसी में किया गया। यहां 19 रोगी 14 दिन के अंदर एजीथ्रोमाइसिन के फार्मूले से निगेटिव हो गए। कोरोना संक्रमित इन रोगियों में किसी दूसरी बीमारी के लक्षण भी नहीं उभरे। इनका खानपान सामान्य रहा। इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग और क्वारंटीन का पूरा एहतियात बरता गया। इसके अलावा हैलट में आए रोगियों को भी एजीथ्रोमाइसिन दी गई। यहां के 30 कोरोना संक्रमित रोगी अब तक निगेटिव आ चुके हैं। इसके अलावा अभी जो कोरोना पॉजिटिव हैं, उन्हें यह दवा दी जा रही है। सीएचसी सरसौल केे प्रभारी डॉ. एसएल वर्मा का कहना है कि रोगियों को एजीथ्रोमाइसिन के साथ पैरासीटामॉल, मल्टी विटामिन दी गई और उन्हें खुश रखने की कोशिश की गई। इससे अच्छी रिकवरी हुई है।
ऐसे होता है फायदा
कोरोना रोगी के फेफड़ों में निमोनिया होता है। इसके बाद बैक्टीरिया इसे डैमेज करते हैं। एंटी बायोटिक के असर से बैक्टीरिया मर जाते हैं। इनसे रोगी का सांस तंत्र क्षतिग्रस्त नहीं हो पाता है, जिस वजह से रोगी एआरडीएस की स्टेज में नहीं जा पाता। इसके अलावा एजीथ्रोमाइसिन हार्ट में भी कारगर है। अभी तक जो कोरोना संक्रमित रोगी मरे हैं, उनका हार्ट फेल हुआ था।
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विशेषज्ञ ने कहा
जीएसवीएम मेडिकल कालेज की प्राचार्य और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आरती लालचंदानी ने एजीथ्रोमाइसिन पर शोध किया है। उनका कहना है कि यह दवा फेफड़ों को संक्रमण से बचाती है। इसके साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं। इसके अलावा यह बहुत से बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण में काम करती है। इसके परिणाम शोध में बहुत अच्छे हैं।
तुक्के पर भी हो रहा है इलाज
कोरोना की कोई निश्चित नुस्खा न होने से तुक्के पर भी इलाज चल रहा है। जो दवा फायदा कर जा रही है, उसे संजीवनी माना जा रहा है। रोगियों को एचआईवी की दवा, स्वाइन फ्लू की टैमी फ्लू और मलेरिया की हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन भी दी गई। साइड इफेक्ट्स होने की वजह से कुछ मेडिकल कर्मियों ने हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन खाने से मना कर दिया। इस दवा से गुर्दे में खराब असर आ सकता है।
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