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Kanpur News: स्किल डिजिटल प्लेटफार्म से होगी मेडिकल की पढ़ाई

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कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिकल की पढ़ाई ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर स्किल डिजिटल प्लेटफार्म से होगी। इसमें किसी कक्षा का व्याख्यान दूसरे मेडिकल कॉलेज के छात्र भी देख सकेंगे। साथ ही वीडियो भी सुरक्षित रखा जाएगा। इससे छात्रों को पढ़ने और विषय समझने में आसानी होगी। डिजिटल प्लेटफार्म के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने शनिवार को प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे सोमवार को शासन को भेजा जाएगा।
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एमबीबीएस की पढ़ाई के तौर-तरीकों में बदलाव किया गया है। अभी तक एमबीबीएस की पढ़ाई पूरा करने के बाद छात्र को इंटर्नशिप में अस्पताल भेजा जाता है लेकिन अब एमबीबीएस प्रथम वर्ष से ही छात्र को क्लीनिकल साइड की भी जानकारी दे रहे हैं। कॉलेज में स्मार्ट कक्षाएं शुरू हो गई हैं। अब स्किल डिजिटल प्लेटफार्म भी तैयार किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि कई मेडिकल कॉलेज डिजिटल प्लेटफार्म के संबंध में प्रस्ताव भेज चुके हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ने भी प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे सोमवार को भेजेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रस्ताव 22 करोड़ रुपये का तैयार किया गया है। डिजिटल प्लेटफार्म के संबंध में दो कंपनियां अभी आई हैं। बातचीत के बाद इनसे प्लेटफार्म लिया जाएगा। डॉ. काला का कहना है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भी व्यवस्था रहेगी। विषय के संबंध में छात्रों को गहरी जानकारी भी मिल जाएगी। मेडिकल कॉलेजों को एक-दूसरे से जोड़ दिया जाएगा। अगर किसी कॉलेज में कोई अच्छा शिक्षक है तो उसका व्याख्यान दूसरे कॉलेज के छात्र भी सुन सकेंगे। उसे अपने पास सुरक्षित कर रख भी सकेंगे।
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साथ ही वर्चुअल डिसक्शन भी व्यवस्था की जा रही है। मृत मानव शरीर अगर एनाटमी विभाग को नहीं मिलते हैं तो भी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित नहीं होने पाएगी। छात्र वर्चुअल कैडबर से पढ़ाई कर सकेंगे। वर्चुअल डिसक्शन में एआई भी उनकी मदद करेगा। इससे छात्रों में विषय की समझ बढ़ेगी। स्किल डिजिटल प्लेटफार्म का लाभ स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को मिलेगा। उन्होंने बताया कि स्मार्ट कक्षाओं में यूजी छात्रों को वेंटिलेटर के इस्तेमाल करने के संबंध में भी जानकारी दी जा रही है।
नेशनल मेडिकल कमीशन के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज में फाउंडेशन कोर्स शुरू हो गया है। इसमें छात्र-छात्राओं को योग, नैतिकता, मानवीयता आदि के बारे में बताया जा रहा है। प्राचार्य ने बताया कि इसके साथ ही खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए छात्र-छात्राओं को प्रेरित किया जाता है। साथ ही छात्र गांवों को गोद लेते हैं। इससे उनकी सामाजिकता की समझ बढ़ती है। इससे डॉक्टर और रोगी के बीच के संबंधों में सुधार आएगा। मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही छात्रों में दूसरे की पीड़ा के प्रति संवेदना विकसित होगी।
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