कानपुर देहात। तेज हवा संग शुक्रवार तड़के से शुरू हुई बारिश शनिवार दोपहर तक जारी रही। इससे अकबरपुर मेडिकल कॉलेज परिसर जलमग्न हो गया। मुख्य मार्ग से लेकर इमरजेंसी, ओपीडी, महिला अस्पताल की जाने वाली सड़क पर पानी भरा रहा। अस्पताल आने वाले मरीजों को जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ा। इससे मरीज व तीमारदार परेशान हुए।
24 घंटे लगातार बारिश होने से मेडिकल कॉलेज में जल निकासी व्यवस्था की पोल खुल गई। नाले, नालियां चोक होने से चारों तरफ जलभराव नजर आया। इससे मुख्य मार्ग से अंदर तक जाने में मरीज और तीमारदारों को गंदे और बारिश के पानी के बीच से होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ा। कई स्टाफ कर्मी, मरीज व तीमारदार ऑटो, ई-रिक्शा लेकर अंदर तक पहुंचे। हालांकि बारिश की वजह से अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या में गिरावट देखी गई।
शनिवार को ओपीडी में करीब 200 मरीज ही इलाज कराने के लिए पहुंचे थे। जो मरीज ओपीडी पहुंचे उन्हें घुटने के नीचे तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। यही हालात इमरजेंसी, ट्रामा सेंटर और महिला अस्पताल जाने के लिए रहे। सड़क पर पानी भरे होने से मरीज, तीमारदारों को चलने का अंदाजा नहीं रहा, इससे वह डरे और सहमे नजर आए। हालांकि कुछ जगहों पर सुरक्षा गार्ड उनकी मदद करते नजर आए। बता दें कि अस्पताल परिसर में नवनिर्माण के बाद से ड्रेनेज व्यवस्था ध्वस्त है। अस्पताल परिसर की नालियां व नाला माती रोड के मुख्य नाले से नहीं जुड़ा है। इस वजह से तेज बारिश होने पर अक्सर जलभराव हो जाता है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि जिन स्थानों पर जलभराव है, वहां पंपिंग सेट लगवा कर पानी निकलवाया जाएगा। फिलहाल बारिश कम होते ही पानी कम हो जाएगा।
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आवासीय परिसर, हॉस्टल के चारों तरफ जलभराव
मेडिकल कॉलेज परिसर में डॉक्टरों के आवास और हॉस्टल बना हुआ है। इसमें स्वास्थ्य कर्मी परिवार के साथ रहते हैं। शनिवार को जलभराव हो जाने से हॉस्टल के अंदर तक पानी भरा नजर आया। यहां रहने वाले कर्मचारी, उनके बच्चे जलभराव के बीच से आवागमन करते दिखे। यही हाल स्टाफ के आवासों का रहा, जहां चारों तरफ पानी भरा नजर आया। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि जल निकासी के इंतजाम न होने की वजह से यह समस्या काफी दिनों से चली आ रही है।
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बारिश को लेकर इमरजेंसी व ट्रामा में अलर्ट
प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि बारिश की वजह से कई जगह दीवार, घर गिरी की जानकारी सामने आई है। इसको लेकर इमरजेंसी व ट्रामा सेंटर के स्टाफ को सक्रिय रखा गया। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी तरह से घायल मरीज को त्वरित इलाज दिया जाए। अस्पताल आने वाले मरीज को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इसके लिए ईएमओ के साथ हड्डी रोग विशेषज्ञों को 24 घंटे तैनात किया गया है।