एक आदमी के तीन-तीन मृत्यु प्रमाणपत्र, वो भी अलग-अलग वर्षों के। ऐसा ही एक मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ग्वालटोली शाखा में सामने आया है। बैंक प्रबंधन ने नगर निगम के अफसरों को मामले की जानकारी देते हुए खाते से भुगतान को रोक दिया है।
बैंक की शाखा में 14/4 मकरावटगंज, कर्नलगंज निवासी मोहम्मद हलीम का खाता वर्ष 2001 में खुला था। खाता संख्या 10388277331 में सालों से निकासी बंद थी। 2011 से इस खाते में पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) पेंशन के तौर पर हर महीने 1500 रुपये आ रहे थे।
28 दिसंबर 2020 तक पेंशन आई थी, जबकि इस खाते से निकासी नहीं हो रही थी। इसके चलते बैंक ने खाते को इनऑपरेटिव की सूची में डाल दिया था। शनिवार को अर्शी खान नाम की लड़की एक अन्य महिला के साथ बैंक आई थी। मोहम्मद हलीम को पिता बताते हुए उनकी मौत की जानकारी दी और खाते से भुगतान कराने को कहा।
बैंक अफसर ने आधार कार्ड चेक किया तो उसमें पता और पिता का नाम सही मिला। इसके बाद बैंक ने प्रक्रिया शुरू की। अर्शी से मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा गया तो उसने 23 जुलाई 2011 को नगर निगम की ओर जारी प्रमाण पत्र दिया। बैंक अफसर ने पूछा कि पिता की मृत्यु कब हुई है तो उसने बताया 2017 को देहांत हुआ था और उसने 20 अगस्त 2017 को जारी प्रमाणपत्र दे दिया।