उत्तर प्रदेश के महोबा के पनवाड़ी में झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जिसने सरकार और पुलिस के महिला सुरक्षा के दावों की पोल एक बार फिर खोल कर रख दी है। प्रदेश में जंगलराज जैसी स्थिति है। जिसने यूपी पुलिस को दोबारा कटघरे में ला खड़ा किया है। ‘बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ’ का नारा कागजों में दर्ज इबारत भर बनकर रह गया है। हकीकत से इसका कोई सरोकार नहीं है।
मामला थाना महोबकंठ के एक गांव का है। यहां छेड़छाड़ से परेशान युवती ने घर पर फांसी लगाकर जान दे दी। गुरुवार की देर शाम आरोपी ने घर में घुसकर छेड़खानी करते हुए धमकी दी थी। एक माह से लगातार परेशान किए जाने पर दो बार थाने में शिकायत की गई। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। घटना से परिजनों व ग्रामीणों में आक्रोश है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 20 वर्षीय युवती को गांव का ही युवक एक माह से लगातार परेशान कर रहा था। यह बात युवती ने अपने पिता को भी बताई। जिसके बाद पिता ने थाने में लिखित सूचना दी लेकिन कोई कार्रवाई न होने से आरोपी के हौसले बढ़ते गए। गुरुवार की देर शाम जब परिजन खेत चले गए। तब युवक ने घर में घुसकर युवती से छेड़खानी की और किसी से कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने और शोहदे के लगातार परेशान करने से आहत युवती ने शुक्रवार की सुबह कमरे के अंदर पंखे के छल्ले से रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। काफी देर तक दरवाजे न खुलने पर परिजनों को आशंका हुई। तब उन्होंने दरवाजे तोड़कर देखा तो युवती फांसी पर लटकती मिली।
मृतका के पिता ने बताया कि एक माह से गांव का ही युवक उसकी पुत्री को परेशान करते हुए जबरन शादी का दबाव बना रहा था। कोर्ट मैरिज न करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। 18 व 22 दिसंबर को आरोपी के खिलाफ थाने में लिखित सूचना दी गई थी। आरोप है कि पुलिस ने आजतक कोई कार्रवाई नहीं की। जिससे पुत्री ने यह कदम उठाया। सूचना पर पुलिस ने घटनास्थल की जांच करते हुए शव को कब्जे में लिया है। थाना प्रभारी वीरेंद्र प्रताप का कहना है कि मामले की जांच कराकर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
पीड़िता व उसके पिता ने थाना महोबकंठ में कोई तहरीर नहीं दी। उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा गया था। शिकायती पत्र जांच के लिए उनके पास आया था। गुरुवार को दोनों पक्षों को कुलपहाड़ बुलाया गया था पीड़िता आई थी, लेकिन दूसरा पक्ष नहीं आया। जिसके बाद पीड़िता के बयान दर्ज करते हुए कार्रवाई का भरोसा दिया गया था।
- उमेश चंद्र,पुलिस क्षेत्राधिकारी कुलपहाड़
पुलिस कार्रवाई करती तो नहीं होती घटना
एक ओर जहां महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों में शासन द्वारा त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए जा रहे हैं। वहीं स्थानीय थाने में दो बार शिकायत के बाद छेड़छाड़ के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई न होना पुलिस की लापरवाही उजागर कर रहा है। घटना के बाद ग्रामीण पुलिस पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि पुलिस कार्रवाई करती तो यह घटना नहीं होती।