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Digital Gita: ई-साक्ष्य एप के सामने झूठ बोलना पड़ेगा भारी; गवाहों के मुकरने का खेल खत्म, पढ़ें खास रिपोर्ट

Thu, 12 Mar 2026 10:53 AM IST
Himanshu Awasthi अनुज वर्मा, अमर उजाला, महोबा

सार

Mahoba News: यूपी पुलिस अब ई-साक्ष्य एप के जरिए गवाहों के डिजिटल बयान और लोकेशन आधारित सबूत दर्ज कर रही है। ऑनलाइन पंचायतनामा से समय की बचत और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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सांकेतिक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बॉलीवुड की फिल्मों में अदालतों के अंदर गवाहों को श्रीमद्भागवत गीता पर हाथ रखकर कसम खाने और झूठ बोलने का सीन तो आप सबने देखा ही होगा। यह फिल्मी व्यवस्था भले ही काल्पनिक हो और इसका असलियत से कोई लेना-देना न हो। मगर हकीकत में अदालतों में कोई गीता नहीं होती है, लेकिन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) ने पुलिस के हाथ ऐसी ही एक डिजिटल श्रीमद्भागवत गीता दे दी है, जिस पर बयान देने के बाद झूठ बोलना, अपने लिए मुश्किलें खड़ी करना है। उत्तर प्रदेश पुलिस की इस डिजिटल गीता का नाम है ई-साक्ष्य एप।

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पुलिस विभाग के उप निरीक्षक, निरीक्षकों के मोबाइल में अपलोड ई-साक्ष्य एप ऐसा ही डिजिटल हथियार है, इससे मुकदमों को मजबूत आधार दिया जा रहा है। विवेचक ई-साक्ष्य का प्रयोग विवेचना के दौरान करते हैं। इसमें घटनास्थल पर मिले सबूतों की तस्वीरें, वीडियो बनाकर अपलोड की जाती हैं। मुकदमे की विवेचना शुरू होने पर इसमें सभी गवाहों के बयान विवेचक अपने मोबाइल से ऑडियो व वीडियो में दर्ज कर रहे हैं और इसे ऑनलाइन कर देते हैं। बयान होने के बाद विवेचक अपनी व गवाह की संयुक्त फोटो भी अक्षांश और देशांतर के साथ अपलोड करते हैं।

न्यायालयों के अंदर भी किया जा सकता है प्रयोग
वीडियो अपलोड होने पर पुलिस को एक 16 अंक का यूनिक नंबर (एसआईडी) मिलती है, जिसे वह मुकदमे की केस डायरी में लिखते हैं। 16 अंक की यह एसआईडी एप के जरिए कभी भी, कहीं भी खोलकर देखी जा सकती है, कि विवेचना के समय वादी, प्रतिवादी, लेखक समेत अन्य गवाहों ने क्या बयान दर्ज कराए थे और क्या प्रमाण उस वक्त मिले थे। इसका प्रयोग न्यायालयों के अंदर भी किया जा सकता है। बयान देने के बाद अगर कोर्ट में बयान बदला जाता है, तो इसके लिए पहले झूठ बयान देने का अपराध भी बनता है और मुकदमा भी कमजोर हो जाता है। इससे बयान देने वाले की लिए कानूनी मुश्किलें खड़ी होनी शुरू होती हैं। ई-साक्ष्य एप के जरिए घटनास्थल पर मिले सबूतों के साथ ही तलाशी, जब्ती बयान दर्ज किए जाते हैं।

मेडिकल, पंचायतनामा व अन्य अभिलेख भी अब होंगे ऑनलाइन
पुलिस विभाग, भारी-भरकम कागजी कार्रवाई को खत्म करने के लिए तेजी से चल रहा है। विभाग अब घायलों की मजरूबी चिट्ठी (मेडिकल के लिए थाने से दिए जाने वाला कागज), मृतकों का पंचायतनामा के कागज भी ऑनलाइन करना शुरू कर चुका है और इसके लिए उप निरीक्षकों को प्रशिक्षित किया जाना भी शुरू कर दिया गया है। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उप निरीक्षक मौके पर जाकर सारी जरूरी जानकारी हासिल कर उसे डायरी में नोट करेंगे और थाने आकर सीसीटीएनएस कार्यालय से ऑनलाइन पंचायतनामा भरकर उसे सीएमओ ऑफिस, पुलिस लाइन, पोस्टमार्टम हाउस को ईमेल करेंगे। इससे वहां पर इन अभिलेखों को निकालकर कार्रवाई शुरू की जा सके। इसी तरह से घायल होने पर थानों पर बनाई जाने वाली मजरूबी चिट्ठी भी ऑनलाइन करके पीएचसी, सीएचसी भेजी जाएगी। इस नई व्यवस्था के लिए कर्मचारियों को धीरे-धीरे प्रशिक्षित किया जा रहा है।

न्यायालयों को भी भेजे जाएंगे अब ऑनलाइन अभिलेख
महोबा। पुलिस विभाग की ओर से केवल जनता के लिए नहीं न्यायालयों का समय बचाने के लिए भी इस डिजिटल साधन का प्रयोग किया जाएगा। आने वाले कुछ माह में विभाग हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट में होने वाली जमानतों व अन्य कार्रवाई के अभिलेख अब थानों से सीसीटीएनएस के जरिए संबंधित न्यायालय के ईमेल पर भेज सकेंगे। इससे समय पर अभिलेख न्यायालय में पहुंच सकें और सभी का समय बच सके और विवेचक भी भारी-भरकम पत्रावली को ले जाने से बच सकें।

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घटनाओं व विवेचना के समय डिजिटल प्रमाण तैयार करना बहुत ही आवश्यक है और यह पूरी तरह से लागू हो चुका है। ई-साक्ष्य एप के साथ ही पंचायतनामा व अन्य अभिलेखीय प्रक्रिया भी अब ऑनलाइन कर दिया गया है। इससे समय बचे और मुकदमों के पीड़ितों को समय पर कोर्ट से न्याय मिल सके।  -वंदना सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक, महोबा

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