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Mahashivratri 2021: महादेव की कृपा पाने के लिए ऐसे करें पूजन, ये रही पूरी जानकारी

Wed, 10 Mar 2021 05:40 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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महाशिवरात्रि 2021 - फोटो : अमर उजाला
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प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि का व्रत 11 मार्च 2021 दिन गुरुवार को किया जाएगा। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए यह दिन विशेष माना गया है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।
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महाशिवरात्रि पर मंदिरों में शिवभक्तों की लंबी कतारे लगती हैं। भक्त शिव जी की कृपा पाने के लिए व्रत और विधिवत पूजन करते हैं। महाशिवरात्रि पर नियम और निष्ठा के साथ की गई पूजा आपके जीवन के कष्टों को दूर करती है। इसके साथ ही महाशिवरात्रि का पावन पर्व पर पूजा अनुष्ठान और मंत्र जाप करके रोगों और ग्रह दोषों से भी मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय श्रीवास्तव से जानिए महाशिवरात्रि व्रत व पूजन से जुड़ी विशेष जानकारी...

महाशिवरात्रि पूजन से ये ग्रह होते हैं शांत
महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा करने से शनिदेव, राहु और चंद्रमा की अशुभ दशा से मुक्ति प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव का रूद्राभिषेक करने से इसके साथ ही अन्य ग्रहों का भी दोष दूर होता है। शनि की साढ़े साती के लिए शिवजी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। 
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हृीं ओम् नमः शिवाय हृीं

शिव जी का रूद्र गायत्री मंत्र राहु-केतु और शनि की पीड़ा से मुक्ति दिलाता है। यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उन्हें भी रूद्र गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। इस प्रकार है शिव जी का रूद्र गायत्री मंत्र।
ऊं तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।।

ये मंत्र दिलाएगा रोगों व अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति
भगवान शिव को देवों के देव महादेव और कालों के काल महाकाल कहा जाता है। मृत्यु भी इनके भय से दूर भागती है। शिव जी के महामृत्युंज मंत्र के जाप से असाध्य रोग भी दूर हो जाता है। इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र से अकाल मृत्यु ग्रह दोष आदि से भी मुक्ति प्राप्त होती है। महाशिवरात्रि का पावन पर्व इन मंत्रों के जाप के लिए बहुत ही उत्तम रहता है। इस प्रकार है महामृत्युंजय मंत्र

ऊं त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥


शिव जी की कृपा पाने के इस मंत्र का करें जाप
भगवान शिव का मूल मंत्र जिसे पंचाक्षरी मंत्र भी कहा जाता है। यह मंत्र बहुत ही प्रभाव शाली माना गया है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करते हुए इस मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे आपके जीवन की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं और जीवन में सुख समृद्धि आती है।
''ऊं नम: शिवाय''

महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि तिथि- 11 मार्च 2021 (गुरुवार)
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 11 मार्च 2021 को दोपहर 2 बजकर 39 मिनट से
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 12 मार्च 2021 को दोपहर 3 बजकर 2 मिनट तक
शिवरात्रि पारण समय: 12 मार्च की सुबह 6 बजकर 34 मिनट से शाम 3 बजकर 2 मिनट तक

महाशिवरात्रि की पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन प्रातःकाल स्नान से निवृत होकर एक वेदी पर कलश की स्थापना कर गौरी शंकर की मूर्ति या चित्र रखें। कलश को जल से भरकर रोली, मौली, अक्षत, पान सुपारी ,लौंग, इलायची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, कमलगटटा, धतूरा, बिल्व पत्र, कनेर आदि अर्पित करें और शिव की आरती पढ़ें। रात्रि जागरण में शिव की चार आरती का विधान आवश्यक माना गया है। इस अवसर पर शिव पुराण का पाठ भी कल्याणकारी कहा जाता है।

महाशिवरात्रि पूजा सामग्री
महाशिवरात्रि की पूजा में बेलपत्र, भांग, धतूरा, गाय का कच्चा दूध, चंदन, रोली, कपूर, केसर, दही, घी, मौली, अक्षत (चावल), शहद, शक्कर, पांच प्रकार के मौसमी फल, गंगा जल, जनेऊ, वस्त्र, इत्र, कुमकुम, कमलगटटा्, कनेर पुष्प, फूलों की माला, खस, शमी का पत्र, लौंग, सुपारी, पान, रत्न, आभूषण, परिमल द्रव्य, इलायची, धूप, शुद्ध जल, कलश आदि।
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