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Mukhtar Ansari Death: माफिया मुख्तार की मौत, दिल का दौरा पड़ने के चलते मेडिकल कॉलेज में कराया गया था भर्ती

Thu, 28 Mar 2024 09:58 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

Banda News: मंडल कारागार में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को गुरुवार देर शाम एम्बुलेंस से दोबारा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। डॉक्टरों ने मुख्तार को मृत घोषित कर दिया।
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Mukhtar Ansari Death - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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करीब ढाई साल से बांदा जेल में बंद पूरब के माफिया मुख्तार अंसारी की गुरुवार देर रात हार्ट अटैक (कार्डियक अरेस्ट) से मौत हो गई। मुख्तार को मौत से करीब तीन घंटे पहले ही इलाज के लिए मंडलीय कारागार से मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां नौ डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में जुटी थी। रात करीब साढ़े दस बजे प्रशासन ने मुख्तार की मौत की सूचना सार्वजनिक की। तब तक मुख्तार के परिवार का कोई सदस्य मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा था।

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गुरुवार शाम करीब साढ़े छह बजे मुख्तार की जेल में तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और करीब साढ़े आठ बजे के आसपास उसे मेडिकल कॉलेज लाया गया था। जहां दो घंटे तक उसका इलाज चला। उसे आईसीयू से सीसीयू में शिफ्ट किया गया। जहां रात साढ़े दस बजे के आसपास उसकी मौत हो गई।

बता दें कि दो दिन पहले 26 मार्च को मुख्तार ने जेल प्रशासन से पेट में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उसे तत्काल ही मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों ने ओवर ईटिंग व कब्ज बताकर इलाज किया और 14 घंटे बाद उसी दिन देर शाम उसे वापस मंडलीय कारागार भेज दिया था। इधर, गुरुवार शाम साढ़े सात बजे के आसपास अचानक मुख्तार की तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने आनन-फानन उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।

मुख्तार का परिवार भी बांदा के लिए लखनऊ से चल चुका है। इधर हालात बिगड़ने न पाए, इसके लिए जिले भर की पुलिस फोर्स को अलर्ट कर दिया गया है। जेल के भीतर भी पुलिस फोर्स तैनात है। देर रात तक डीएम और एसपी भी मेडिकल कॉलेज में मौजूद रहे और मुख्तार की पल-पल की खबर लेते रहे।

दोपहर से बिगड़ी थी तबीयत, खाई थी सिर्फ खिचड़ी
दो दिन पहले मेडिकल कॉलेज से आने के बाद मुख्तार ने खाना-पीना न के बराबर कर दिया था। बुधवार तक कुछ फल ही खाए थे। जेल सूत्रों के मुताबिक गुरुवार दोपहर से उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ने लगी थी। सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के तीन डॉक्टरों की टीम ने मौके पर पहुंच कर उसकी सेहत की जांच की थी। गुरुवार को मुख्तार ने सिर्फ थोड़ी सी खिचड़ी ही खाई थी। 

प्रशासन खामोश, फोर्स के साथ अर्धसैनिक बल भी तैनात
रात करीब आठ बजे जैसे ही प्रशासन के अधिकारी एंबुलेंस से मुख्तार को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे, वहां भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया। डॉक्टरों की टीम के साथ डीएम और एसपी भी मेडिकल कॉलेज के भीतर दाखिल हो गए। इसके बाद जैसे-जैसे समय बीतता गया और जिले में ही नहीं प्रदेश भर में मुख्तार को लेकर तरह तरह की चर्चाएं होना शुरू हुई, वैसे ही फोर्स की तादात भी बढ़ती चली गई। यहां तक कि रात के साढ़े नौ बजे तक अर्धसैनिक बल भी तैनात कर दिया गया। डीएम और एसपी पिछले एक घंटे से मेडिकल कॉलेज के भीतर ही हैं। कोई डॉक्टर भी बाहर नहीं निकल रहा है। बाहर खड़े लोगों को मुख्तार के परिजनों के आने का इंतजार है।

जेल में सन्नाटा, रोजेदार बंदियों में छाई मायूसी
मुख्तार की मौत की खबर जैसे ही मंडलीय कारागार पहुंची, वहां बंदियों की चहल-पहल थम सी गई। बंदियों से लेकर जेल के सिपाहियों और अधिकारियों को भी यकीन नहीं हो रहा था कि मुख्तार अब अपनी बैरक में कभी वापस नहीं आएगा। बता दें कि भले ही मुख्तार माफिया हो, लेकिन जब से वह बांदा जेल आया था, हर रमजान पर रोजेदार बंदियों को अपनी ओर से फल, मिठाई व सिंवई बंटवाता था। इस बार ऐसा रमजान रहा कि शुरू से ही उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। उस पर रोजे रहने के कारण सेहत लगातार और बिगड़ती चली गई थी। इस कारण इस बार जेल में रमजान और होली भी फीकी ही रही थी।

हत्या, जानलेवा हमला सहित मुख्तार पर 59 मुकदमें
माफिया मुख्तार अंसारी पर हत्या, जानलेवा हमला, धोखाधड़ी गैंगस्टर सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में करीब 64 मुकदमें दर्ज हैं। गाजीपुर में अलग-अलग तीन मुकदमें 302, 506, 302, वाराणसी में 302, 307, गाजीपुर में 506, वाराणसी 364, 395, गाजीपुर 247,148,149, गाजीपुर 147,506, गाजीपुर 467,468, 420, 120 बी, गाजीपुर 302, गाजीपुर 147, 323, 506, चंदौली 307,302, वाराणसी 137,148,149, 302, नई दिल्ली 365, 387, नई दिल्ली 5 टांडा, गाजीपुर 353,503, 506, गाजीपुर 352, 323, 307, गाजीपुर (3) 1 यूपी गैंगस्टर, गाजीपुर एनएसए, गाजीपुर 130,135, 136 (1), 136 (2) लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, वाराणसी 364 ए, 365, 302, 120 बी, गाजीपुर 506, सोनभद्र 364 ए, वाराणसी 506, वाराणसी एनएसए, गाजीपुर एनएसए, वाराणसी 506, आगरा 419, 420, 109, 120 बी, लखनऊ 307, 302, 120 बी, लखनऊ 506, लखनऊ 2/3 गैंगेस्टर एक्ट, लखनऊ 147, 336, 353, 506, लखनऊ 3/7/25 आम्र्स एक्ट, लखनऊ 353, 504,506, लखनऊ 147,148, 149, 307, मऊ 147,148, 149, 393, 307, 507, 342, गाजीपुर 302, 506, 120 बी, गाजीपुर 147,148, 149, 302,307, 404, 120 बी, 7 क्रमिनल एक्ट, मऊ 147,148, 149, 302, 435, 436, 153 ए, गाजीपुर गैंगेस्टर एक्ट, गाजीपुर 302, 120 बी,7 क्रमिनल एक्ट, गाजीपुर 307, 506, 120 बी, नई दिल्ली धारा 3 मकोका एक्ट, मऊ 147,148, 149, 307, 302, 325, 120 बी, मऊ 307, 302, 120 बी, गाजीपुर 3 (1) गैंगेस्टर एक्ट, मऊ गैंगस्टर एक्ट, आजमगढ़ 147,148 ख, 149, 302, 307, 120 बी, मोहाली (पंजाब) 386, 506, मऊ 319, 420, 467, 468, आजमगढ़ 3 (1) गैंगस्टर, लखनऊ 357,371, 120 बी, मऊ 3 (1) गैंगस्टर एक्ट, बाराबंकी, 320, 468, 120 बी समेत करीब 59 मुकदमें दर्ज हैं।
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मौत के वक्त कोई नहीं था मददगार
भले ही बांदा जनपद में मुख्तार के तमाम समर्थक थे, लेकिन जबसे उसके समर्थकों के घरों पर जेसीबी गरजी थी, तभी से सभी ने उससे दूरी बना रखी थी। जनपद से गिने चुने लोग भी जेल में उससे मिलने नहीं जाते थे। शायद यही वजह थी कि जब वह अपनी जिंदगी के अंतिम क्षण जी रहा था, उस वक्त भी जेल तो दूर की बात है उसका कोई अपना मेडिकल कॉलेज के आसपास भी नहीं दिखाई दिया। मुख्तार के कुछ समर्थक उसके परिजनों के संपर्क में जरूर रहे और उन्हें प्रशासन से बचकर मेडिकल कॉलेज से बाहर के हालातों की खबर देते रहे। देर रात 11 बजे तक उसके समर्थकों में से कोई भी मेडिकल कॉलेज के आसपास नहीं दिखाई दिया। बता दें कि अतीक हत्याकांड के बाद जनपद में मुख्तार के करीबी दो लोगों के मकानों पर भी प्रशासन ने जेसीबी चलाई थी।
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