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मां तुझे प्रणाम: महोबा में हुई थी 16 क्रांतिवीरों की सामूहिक फांसी, दास्तां सिहरन के साथ दिलाती है जोश

Thu, 10 Aug 2023 05:08 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा

सार

Mahoba News: गणतंत्र व स्वतंत्रता दिवस पर बुंदेली समाज प्रतिवर्ष यहां ध्वजारोहण करता है। 31 अगस्त से शुरू होने वाले ऐतिहासिक कजली मेले की भव्य शोभायात्रा का आगाज भी इसी शहीद स्थल से होगा।
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हवेली दरवाजा में इसी मैदान में दी गई थी 16 क्रांतिकारियों को फांसी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महोबा जिले में प्रथम स्वाधीनता संग्राम के दौरान शहर के हवेली दरवाजा मैदान में 16 क्रांतिवीरों को सामूहिक फांसी की दास्तां सिहरन के साथ जोश भी दिलाती है। वर्ष 1857 में ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिवीरों को फांसी दी थी। आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर करने वाले क्रांतिवीरों की याद में रक्षाबंधन के तीसरे दिन विशाल मेला लगता है।

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वीरभूमि राजकीय महाविद्यालय के प्रवक्ता व इतिहासकार डॉ. एलसी अनुरागी बताते हैं कि वर्ष 1857 में विदेशी हुकूमत के खिलाफ हुई गदर में यहां के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। जब अंग्रेजों का जीना हराम हो गया तो तत्कालीन कलेक्टर जनरल व्हिंटलॉक बर्बरता पर उतर आया। बुंदेलखंद के गांवों का नेतृत्व कर रहे एक सैकड़ा से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

क्रांतिकारियों का जज्बा, बुंदेलों में भरता है जोश
इनमें से 16 देशभक्तों को सामूहिक फांसी की सजा सुनाई गई। तय तिथि पर ज्योराहा निवासी भवानी, कल्लू समेत सभी 16 क्रांतिकारियों को हवेली दरवाजा मैदान में लगे इमली के पेड़ पर सामूहिक फांसी दी गई थी। राष्ट्रीय पर्व आने पर यह दास्तां बुंदेलों के दिल-ओ-दिमाग में ताजा हो जाती है। अंग्रेजों के खिलाफ डटकर मुकाबला करने वाले क्रांतिकारियों का जज्बा सुन बुंदेलों में जोश भर जाता है।
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गंदगी से पटा मैदान, नहीं बन सका स्मारक
जिस हवेली दरवाजा मैदान में 16 क्रांतिवीरों को सामूहिक फांसी की सजा दी गई थी, यह स्थान आज भी उपेक्षित है। मैदान में जगह-जगह गंदगी फैली है। यहां शहीदों की याद में स्मारक बनाए जाने को लेकर कई बार आंदोलन हुए लेकिन आज तक शहीद स्मारक नहीं बन सका। 31 अगस्त से शुरू होने वाले ऐतिहासिक कजली मेले की भव्य शोभायात्रा का आगाज भी इसी शहीद स्थल से होगा।
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